चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के आधे प्रयास सफल नहीं है सके हैं, कुछ कदम दूर रह गया भारत
नई दिल्ली। चांद पर लैंड करने के भारत के पहले प्रयास को सफलता नहीं मिल सकी। शनिवार रात इसरो तकरीबन चांद की सतह तक पहुंच गया था, लेकिन 2.1 किलोमीटर पहले ही लैंडर का संपर्क टूट गया। चंद्रयान-2 को जुलाई में लॉन्च किया गया था, जिसने धरती की परिक्रमा पूरी करके चांद के कक्षा में प्रयास किया था। इस पूरे प्रयास का लाइव टेलीकास्ट टीवी पर किया गया, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे देखने के लिए पहुंचे थे। लेकिन 10 मिनट के प्रयास के बाद लैंडर का संपर्क टूट गया, जिसके बाद इसरो चीफ के सिवन ने इस बाबत जानकारी दी।

तीन अहम कंपोनेंट
बता दें कि चंद्रयान-2 में तीन अहम कंपोनेंट थे, पहला ऑर्बिटर,र दूसरे लैंडर और तीसरा रोवर। ऑर्बिटरर और लैंडर के भीतर रोवर है, जिसे जीएसएलवी एमके 3 रॉकेट उर्फ बाहुबलि रॉकेट से लॉन्च किया गया था। 2 सितंबर को ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम अलग हो गया और चांद पर लैंड करने के लिए तैयार हुआ था लेकिन चांद की सतह से कूछ दूरी पर ही इसका संपर्क टूट गया। इस लैंडर का वजन 1400 किलोग्राम है, जिसे भारतीय अंतरिक्षम प्रोग्राम के पितामह विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया था।

पीएम मोदी ने की तारीफ
भारत ने जब लैंडर से संपर्क खो दिया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके लिखा यह बहादुरी के पल हैं और हम हमेशा बहादुर रहेंगे। बता दें कि इससे पहले चांद की सतह पर लैंड करने के कुल 38 प्रयास किए गए हैं, जिसमे से 20 को ही सफलता मिली है। अगर भारत इस मिशन में सफलता हासिल करता तो ऐसा करना वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जाता। विशेषज्ञों ने पहले ही इस बात की चेतावनी दी थी कि चांद पर लैंड करना काफी मुश्किल होगा।

आप हमेशा बहादुर बने रहिए
जब लैंडर का संपर्क टूटा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों से कहा कि आप हमेशा बहादुर बने रहिए। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है, देश को आप पर गर्व है। इससे पहले चीन का स्पेसक्राफ्ट चांद पर लैंड किया था। जिसके बाद चीन दोबारा यहां लैंड करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा नासा भी कोशिश कर रहा है कि वह एक बार फिर से चांद पर लैंड कर सके, माना जा रहा है कि इसी वर्ष नासा चांद पर लैंड करेगा।












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