कर्नाटक के सीएम स्वामी की पार्टी में रार, अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

बेंगलुरु। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में सत्ताधारी गठबंधन कांग्रेस-जेडीएस को मिली करारी शिकस्त के बाद जनता दल (एस) के अंदर घमासान मचा हुआ है। जेडीएस के नेता हार के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी बीच जेडीएस के कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष एच विश्वनाथ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कुमारस्वामी के राज्य के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके स्थान पर एच विश्वनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। विश्वनाथ पिछड़े कुरुबा समुदाय से संबंध रखते है।

 हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया

हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया

चुनावों में हार के बाद कांग्रेस और जेडीएस के बीच तल्खी देखने को मिली थी। दोनों दलों के नेताओं को हाल ही में एक दूसरे के खिलाफ बोलते हुए देखा गया था। मंगलवार को एच विश्वनाथ ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्य के सीएम कुमारस्वामी को अपना इस्तीफा सौंपा है। बता दें कि इस लोकसभा चुनाव में जेडीएस के संस्थापक एचडी देवगौड़ा तुमकुर से और सीएम कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी मांड्या सीट से चुनाव हार गए थे।

लोकसभा चुनावों में गठबंधन को मिली केवल 2 सीटें

लोकसभा चुनावों में गठबंधन को मिली केवल 2 सीटें

इससे पहले सोमवार को एच विश्वनाथ ने कहा था कि यूएलबी चुनावों के लिए उम्मीदवार सूची को अंतिम रूप देने के लिए उनके इनपुट नहीं मांगे गए थे। इसके अलावा हालिया लोकसभा चुनाव में पार्टी का खराब प्रदर्शन भी उनके इस्तीफे की प्रमुख वजह है। पार्टी ने चुनाव में सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल की थी। गौरतलब है कि, राज्य की 28 लोकसभा सीटों में दोनों पार्टियों को केवल एक-एक सीट पर जीत हासिल हुई थी, जबकि बीजेपी के खाते में 25 सीटें आईं थीं।

सिद्धारमैया और विश्ननाथ के बीच सामान्य नहीं थे रिश्ते

सिद्धारमैया और विश्ननाथ के बीच सामान्य नहीं थे रिश्ते

बता दें कि, विश्वनाथ पार्टी के कांग्रेस से गठबंधन को लेकर भी खुश नहीं थे। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया के साथ उनके मतभेद कई बार खुलकर सामने आए थे। कांग्रेस द्वारा सिद्धारमैया को सीएम बनाने की मांग पर विश्वनाथ ने कांग्रेस नेताओं की काफी आलोचना की थी। यहीं नहीं जब सिद्धारमैया सत्ता में थे तो विश्ननाथ लगातार उनके कामकाज पर सवाल खड़े करते रहे थे। ऐसे में हाल ही के चुनावों में मिली हार के बाद विश्वनाथ के उपर काफी दवाब था।

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