गुर्जर नेताओं की चेतावनी, 'सरकार ने शाम तक नहीं मानी मांगें तो कल से पूरा चक्काजाम'
नई दिल्ली। राजस्थान में चल रहे गुर्जर आंदोलन की आंच लगातार तेज होती जा रही है। आरक्षण की मांग को लकेर गुर्जर आंदोलनकारियों ने रेल की पटरियों पर कई दिनों से कब्जा जमा रखा है। रविवार को गुर्जर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे न मांगी गईं तो वे सोमवार से राज्य में सड़क और रेल यातायात को पूरी तरह जाम कर देंगे।

कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे गुर्जर आंदोलनकारियों ने सरकार को रविवार शाम तक का अल्टीमेटम दे दिया है। आंदोलनकारियों ने सरकार से आज शाम तक उनकी मांगों को लेकर समाधान पेश करने को कहा है। ऐसा न होने पर पूरे राज्य में रेल के साथ ही सड़क यातायात बंद करने की चेतावनी दी है।
बैठक कर रहे गुर्जर नेता
किरोड़ी सिंह बैंसला और अन्य गुर्जर नेता रविवार को आंदोलन को लेकर बैठक कर रहे हैं। बैंसला ने कहा कि सरकार हमें आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। हमारी सिर्फ 6 मांगें हैं जो नहीं मानी जा रही हैं। अगर सरकार इन्हें मान ले तो हमें आंदोलन की जरूरत नहीं होगी।
इसके पहले शनिवार को किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा था कि राजस्थान सरकार को मंत्री अशोक चांदना या किसी प्रतिनिधि को शाम तक एक प्रस्ताव के साथ भेजे। अगर ऐसा नहीं होता है तो गुर्जर नेता आगे की रणनीति बनाने के लिए मजबूर होंगे। शनिवार को सरकार के किसी मंत्री ने बैंसला से मुलाकात नहीं की जिसके बाद गुर्जर नेताओं ने सड़क और रेल यातायात बंद करने की बात कही है। हालांकि भरतपुर के जिला अधिकारी नथमल डिडेल और पुलिस अधिकारियों ने बैंसला से मुलाकात कर उन्हें समझाने की कोशिश की थी।
सातवें दिन भी रेल ट्रैक जाम
इस दौरान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्यों ने बयाना पीलूपुरा में दिल्ली-मुंबई रेल रूट और हिंदौन-बयाना रोड को लगातार सातवें दिन बंद कर रखा है। आंदोलन के चलते कई ट्रेनों के रूट डायवर्ट कर उन्हें भेजा जा रहा है जबकि कई ट्रेनें रद्द भी की गई हैं। वहीं शनिवार को बैंसला की मीटिंग की खबर मिलते ही गुर्जर आंदोलनकारियों ने राजस्थान में कई स्थानों पर सड़क पर उतरकर जाम लगा दिया जिसके चलते कई इलाकों में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बीच सूचना मिल रही है कि राजस्थान सरकार एक बार फिर मंत्री अशोक चांदना को बातचीत के लिए भेज सकती है। गुर्जर नेताओं के तेवर देख सरकार के बदलते रुख ने बातचीत की संभावना एक बार फिर से बढ़ाई है।












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