गुजरात दंगा केस: जाकिया जाफरी की याचिका पर हाईकोर्ट आज सुना सकता है फैसला
गुजरात हाईकोर्ट ने जाकिया जाफरी की याचिका पर फैसला सुनाने के लिए 9 अगस्त की तारीख तय की थी।
गांधीनगर (गुजरात)। साल 2002 के गुजरात दंगा मामले में निचली अदालत से प्रदेश के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी और अन्य को निचली कोर्ट से क्लीन चिट के खिलाफ जाकिया जाफरी की हाईकोर्ट में दायर याचिका पर अब से कुछ देर में फैसला आ सकता है। दिवंगत कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें अब से कुछ देर में फैसला आ सकता है।

गुजरात दंगों पर निचली कोर्ट के फैसले के बाद जाकिया जाफरी और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने गैर सरकारी संगठन सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की। मामले में याचिकाकर्ताओं ने नए सिरे से जांच की मांग की थी। गुजरात हाईकोर्ट ने जाकिया जाफरी की याचिका पर फैसला सुनाने के लिए 9 अगस्त की तारीख तय की थी हालांकि बाद में केस की सुनवाई कर रही जस्टिस सोनिया गोकाणी ने कहा 21 अगस्त को फैसला सुनाने की बात कही थी। पूरे मामले की सुनवाई 3 जुलाई को पूरी हो गयी थी।
क्या है गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार?
अहमदाबाद का गुलबर्ग सोसायटी दंगा कांड 27 फरवरी 2002 को हुए गोधरा कांड के ठीक अगले दिन यानी 28 फरवरी 2002 को हुआ था। अहमदाबाद शहर में घटित हुए इस कांड में दंगाइयों ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला बोल दिया था, जहां कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी अपने परिवार के साथ रहा करते थे। इस हमले में जाफरी सहित 69 लोगों की जान गई थी। नरसंहार में 39 लोगों के तो शव मिल गई ते बाकी 30 लोगों के शव नहीं मिले। कानूनी परिभाषा के तहत सात साल बाद उन्हें भी मृत मान लिया गया। गुलबर्ग सोसायटी में 29 बंगले और 10 फ्लैट थे। गुलबर्ग सोसायटी में सभी मुस्लिम रहते थे, सिर्फ एक पारसी परिवार रहता था।












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