इंदिरा गांधी ने ही नहीं संघ कार्यकर्ताओं ने भी रखा था नाक पर रूमाल, पुरानी तस्वीरें वायरल
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गुजरात के मोरबी में अपनी चुनावी रैली में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें गुजरात से बदबू आती है। मोदी ने मच्छू बांध त्रासदी के वाकये का जिक्र किया, जिसमें इंदिरा गांधी ने अपनी नाक पर रूमाल रखा था। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को गुजरात की सड़कों से बदबू आती है, लेकिन हमारे लिए यह सुगंध है। 38 साल पहले जब इंदिरा गांधी की अपनी नाक पर रूमाल रखी तस्वीर के बारे में मोदी के जिक्र करने के बाद लगातार इस पर चर्चा हो रही है। चित्रलेखा पत्रिका की वो तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें इंदिरा नाक पर रूमाल रखे दिख रही हैं लेकिन इसी पत्रिका में छपी एक और तस्वीर अब सामने आई है, जिसमें आरएसएस के कार्यकर्ता भी मोरबी में मुंह पर रूमाल रखे नजर आ रहे हैं।

मोदी ने जो बोला, वो पूरा सच नहीं
गुजराती पत्रिका चित्रलेखा में इंदिरा गांधी की तस्वीर के साथ एक और तस्वीर छपी थी, जिसमें संघ कार्यकर्ता शव ले जाते हुए खुद भी मुंह रुमाल बांध रखे थे। इंदिरा की तस्वीर के साथ लिखा था मोरबीनु जलतांडव, जबकि संघ कार्यकर्ताओं की फोटो के साथ नीचे लिखा था-गंधाती पशुता, महकती मानवता। इंदिरा की तस्वीर का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें गुजरात से बदबू आती थी इसलिए उन्होंने मुंह पर रुमाल रखा लेकिन उन्होंने पूरी तरह से सच नहीं बोला। मच्छू डैम टूटने से बड़ी संख्या में लोगों और पशुओं की मौतें हुई थीं, यहां लाशें सड़ रही थीं और इससे इलाके में महामारी फैलने का खतरा था। डॉक्टरों ने यहां आने वाले लोगों को मुंह पर रूमाल बांधना जरूरी कर दिया गया था। ऐसे में यहां आने वाले डॉक्टर और राहतकर्मी रुमाल बांधकर ही आते थे। आरएसएस कार्यकर्ता भी यहां रुमाल बांधकर ही आए थे।

ये बोले थे पीएम मोदी
पीएम मोदी ने मोरबी में भाषण देते हुए कहा- मुझे याद है कि जब एक बार इंदिरा गांधी मोरबी आई थीं तो यहां पर बदबू से परेशान हो गई थीं। इसके बाद उन्होंने अपने मुंह पर रुमाल रख ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि उस वक्त चित्रलेखा पत्रिका ने नाक पर रूमाल रखी उनकी तस्वीर भी छापी थी। पीएम मोदी ने अपनी नाक पर हाथ रखकर यह इशारा भी किया कि कैसे वह नाक ढककर मोरबी आईं थीं। आपको बता दें कि यह तस्वीर 1979 में मोरबी के मच्छू डैम हादसे के बाद की है। इसी हादसे के बाद इंदिरा गांधी मोरबी का दौरा करने आई थीं, जिसके बाद यह तस्वीर सामने आई थी।

मारे गए थे करीब 20,000 लोग
11 अगस्त 1979 को यह डैम टूटा था, जिसकी वजह से बहुत से लोग और पशु मारे गए थे। इस हादसे के बाद मोरबी का पूरा क्षेत्र पानी-पानी हो गया था। वहीं दूसरी ओर तत्कालीन सरकार के अनुसार इस हादसे में करीब 1000 लोग मारे गए थे, जबकि विपक्ष ने कहा था कि उस हादसे में करीब 20,000 लोगों की मौत हुई थी।

दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक
मच्छू बांध त्रासदी भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिनी जाती है। 1979 में जब लगातार तीन दिन भारी बारिश से मच्छू बांध ओवर फ्लो हुआ और 11 अगस्त को तीन बजे के करीब डैम टूट गया और कुछ ही मिनटों में पानी ने शहर में तबाही मचा दी। मोरबी की कई एतिहासिक इमारतें जमींदोज हो गई थी। आज भी मोरबी को याद कर आसपास के लोग सिहर उठते हैं।












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