GST 2.0 पर गृहमंत्री Amit Shah बोले, 'जनता के विश्वास का टैक्स, कांग्रेस में इसे लागू करने की हिम्मत नहीं थी'
Amit Shah On GST 2.0: देश भर में नवरात्रि के पहले दिन (22 सितंबर) से जीएसटी करों की नई दरें लागू हो गई हैं। नई दरों से खाने-पीने के सामान से लेकर गाड़ी और गैजेट्स तक की कीमतों में गिरावट आई है। पीएम मोदी ने एक दिन पहले दिए राष्ट्र के नाम संदेश में इसे बचत उत्सव कहा है। गृहमंत्री अमित शाह ने भी जीएसटी की नई टैक्स दरों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे देश के आम लोगों को बहुत फायदा होगा। टीवी चैनल एनडीटीवी को दिए खास इंटरव्यू में गृहमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के पास टैक्स सुधार करने का साहस नहीं था।
गृहमंत्री ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि जीएसटी जनता के विश्वास का टैक्स है। उन्होंने कहा, 'जीएसटी में सुधार से उत्पादन बढ़ेगा और मांग भी बढ़ेगी। जीएसटी का दायरा भी चौड़ा होगा और यह देश के अंदर विश्वास वाली कर प्रणाली बनेगी।'

GST 2.0 को गृहमंत्री ने बताया जनता के लिए राहत का पैगाम
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, 'जनता की जीएसटी रेट को घटाने की कोई डिमांड नहीं थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने खुद ये फैसला लिया है। जीएसटी को लेकर देश में कोई आंदोलन नहीं हुआ, जनता ने कभी इसका विरोध नहीं किया। कुछ नेताओं ने भ्रम फैलाने की कोशिश की थी। राहुल गांधी ने गब्बर सिंह टैक्स और पता नहीं क्या-क्या बोला।'
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार ने अपने विवेक से जनता को राहत देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, 'हमने जीएसटी में सुधार किया है जिससे जनता को राहत मिलेगी। आज से करदाताओं और सरकार में विश्वास का परस्पर एक नया युग शुरू हो रहा है। बिजली, सीमेंट, रोजमर्रा की खाने-पीने की 250 चीजें, दवाइयां, इंश्योरेंस, दोपहिया वाहन, कार, ट्रक, एग्रीकल्चर हर क्षेत्र की चीजें सस्ती होंगी। यह जनता के लिए बहुत बड़ी राहत है।'
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Congress पर भी भड़के Amit Shah
इसी इंटरव्यू में गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कि कांग्रेस कहती है कि यह उनका आइडिया था। पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी लागू करने का सुझाव दिया था। शाह ने कहा, '10 साल सत्ता में रहे, लेकिन इसे लागू नहीं किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने पद संभालते ही इस पर काम किया। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने टैक्स सुधार के लिए काम किया। कांग्रेस से पूछना चाहिए कि आज वह क्रेडिट लेना चाहते हैं, लेकिन पहले बताएं कि ये क्यों लागू नहीं किया गया। हकीकत यह है कि राज्य सरकारों ने जब केंद्र से संवैधानिक गारंटी मांगी, तो उन्होंने कोई गारंटी नहीं दी। इस टैक्स सुधार को लागू करने के लिए जो साहस और इच्छाशक्ति चाहिए थी, वह कांग्रेस के पास कभी नहीं थी।'
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