रक्षा मंत्रालय ने किया ऐलान, शहीद सैनिकों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
। सरकार अब शहीदों के बच्चों की पूरी शिक्षा का खर्च उठाएगी। गुरुवार को रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना से इस बात की जानकारी मिली है। इससे पहले भी शहीदों के बच्चों की शिक्षा फ्री थी लेकिन सिर्फ 10,000 रुपए तक ही। इस सीमा को 'शैक्षिक छूट' कहा जाता है।
नई दिल्ली। सरकार अब शहीदों के बच्चों की पूरी शिक्षा का खर्च उठाएगी। गुरुवार को रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना से इस बात की जानकारी मिली है। इससे पहले भी शहीदों के बच्चों की शिक्षा फ्री थी लेकिन सिर्फ 10,000 रुपए तक ही। इस सीमा को 'शैक्षिक छूट' कहा जाता था और अब इस नई सीमा के साथ ही इस सीमा को खत्म कर दिया गया है।

किसे मिलेगी छूट
शिक्षा में मिलने वाली यह छूट सेनाओं के ऑफिसर्स के बच्चों, ऑफिसर रैंक से नीचे के पर्सनल जो किसी ऑपरेशन में गायब हो गए उनके बच्चों और साथ ही किसी ऑपरेशन में अपना अंग गंवा चुके या शहीद हो चुके सैनिकों के बच्चों को मिलेगी। इस स्कीम के तहत करीब 3,400 बच्चे कवर होंगे और इन बच्चों की शिक्षा पर हर वर्ष पांच करोड़ रुपए का खर्च आएगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से एक ट्वीट में कहा गया है, 'शैक्षिक छूट सिर्फ सरकारी, सरकार से सहायता प्राप्त शैक्षिणिक संस्थाओं, मिलिट्री या सैनिक स्कूल या फिर उन स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलेगी जिन्हें केंद्र या फिर राज्य सरकार की ओर से मान्यता मिली हुई है या फिर उन संस्थाओं जिन्हें केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से पोषित किया जा रहा है, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को मिलेगी।'
साल 1971 में हुई थी शुरुआत
दिसंबर में खबर आई थी कि रक्षा मंत्रालय अपने उस फैसले पर विचार कर रहा है जिसके तहत शहीदों और दिव्यांग सैनिकों के बच्चों को मिलने वाली शैक्षिणिक छूट की सीमा तय की जाएगी। इस फैसले का प्रभावित परिवारों के अलावा, सेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुखों की ओर से विरोध किया गया था। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी जिसमें सेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुख आते हैं उन्होंने रक्षा मंत्री को एक चिट्ठी भी इस बाबत लिखी थी। सैनिकों के बच्चों को मिलने वाली शैक्षिणिक छूट की शुरुआत साल 1971 में हुई थी और भारत-पाकिस्तान की जंग में हिस्सा लेने वाले और शहीद सैनिकों के बच्चे ही इसके । इसके बाद इस छूट को ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन पवन के अलावा काउंटर इंसर्जेसी में शहीद या अपना कोई अंग गंवा चुके सैनिकों के बच्चों तक बढ़ा दिया गया।












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