देश की 30% आबादी कोरोना वायरस से हो चुकी है संक्रमित, सितम्बर में चरम पर पहुंचा संक्रमण- रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारत में वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के एक पैनल ने दावा किया है कि देश में कोरोना महामारी सितम्बर में अपने पीक पर पहुंच चुकी है। ऐसे में अगर सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है और सरकार आगे अधिक ढील नहीं देती है तो फरवरी 2021 तक इस महामारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

भारत सरकार के विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय ने भविष्य में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के फैलाव के अध्ययन करने के लिए मई में एक पैनल का गठन किया था। पैनल ने अपने अध्ययन के आधार पर पाया कि देश में कोरोना वायरस महामारी सितम्बर में ही अपने चरम पर पहुंच गई थी। यही नहीं देश की 30 फीसदी आबादी कोविड-19 से संक्रमित हो चुकी है। इन लोगों के शरीर में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडीज विकसित मिलने से ये निष्कर्ष निकाला गया है। संक्रमण को लेकर पैनल का ये अनुमान आईसीएमआर के अगस्त में उस आकंड़े से दोगुना है जो दूसरे राष्ट्रीय सीरो सर्वे में सामने आया था। आईसीएमआर ने अगस्त तक देश भर में 14 प्रतिशत लोगों में संक्रमण होने का अनुमान लगाया गया था।
1.6 करोड़ होंगे संक्रमण
इसके अलावा, पैनल के अनुमान के मुताबिक महामारी के दौरान देश भर 1.6 करोड़ प्रारंभिक चरण लोगों में प्रारंभिक चरण के संक्रमण होंगे। पैनल के दावे के मुताबिक वर्तमान में 66 लाख प्रारंभिक चरण के संक्रमण हो चुके हैं। हालांकि, पैनल के पूर्वानुमानों पर कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। जैसे कि पैनल ने यहा नहीं बताया कि मामले क्यों गिर रहे हैं। या फिर मामलों में गिरावट जारी रहने की क्या संभावना है? पैनल इस बात का भी उत्तर नहीं दे पाया कि प्रवासियों के पलायन ने मई और जून के बीच मामलों में तेज वृद्धि नहीं की।
पैनल ने लॉकडाउन के प्रभाव का भी अध्ययन किया। सरकार द्वारा बनाए गए पैनल के प्रमुख एम विद्यासागर ने बताया कि यदि लॉकडाउन नहीं लगाया गया होता संक्रमण की दर बहुत ऊपर होती। वहीं अगर इसे दो महीने की देरी से किया जाता तो उस दौरान तो कम नजर आता लेकिन बाद में यह वर्तमान से बहुत अधिक रिपोर्ट किया जाता।












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