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आतंकवाद में आम कश्मीरियों ने अपनों को गंवाया है, नेताओं-मौलवियों ने नहीं- J&K गवर्नर

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य के हुर्रियत और मुख्यधारा की पार्टी के नेताओं और मौलवियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। उन्होंने कहा है कि इन सभी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आम कश्मीरियों के बच्चों को आतंकवाद की आग में झुलसा कर मरवाया है, जबकि इनमें से किसी को अपने बच्चों को नहीं गंवाना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कश्मीर के प्रभावशाली और ताकतवर लोगों ने राज्य के युवाओं के सपनों और जिंदगियों को तबाह किया है। उन्होंने आम कश्मीरी युवाओं से अपील की है कि वे सच्चाई को समझें और राज्य में शांति बहाली और विकास के लिए केंद्र सरकार के प्रयास में शामिल हों। जम्मू के कटरा में श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के सातवें कनवोकेशन समारोह को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा कि नेताओं और प्रभावशाली लोगों के अपने बच्चे बेहतर जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन, आम कश्मीरियों के बच्चों को यही बताया है कि मरने से ही जन्नत नसीब होगी।

'किसी कश्मीरी नेता का बच्चा आतंकवाद का शिकार नहीं हुआ'

'किसी कश्मीरी नेता का बच्चा आतंकवाद का शिकार नहीं हुआ'

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने साफगोई से कहा है कि राज्य के युवाओं के सपनों को रौंदने के लिए वहां के नेता और प्रभावशाली लोग ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि "राजनीतिज्ञों, अफसरशाहों, प्रभावशाली और ताकतवर लोगों ने युवाओं के सपनों और जिंदगियों को कुचल दिया है।" सत्पाल मलिक ने कश्मीर के सभी प्रभावशाली लोगों पर निशाना साधते हुए कहा है कि, "समाज के नेताओं, धर्म के उपदेशकों, मौलवियों, हुर्रियत और मुख्यधारा की पार्टियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल आम कश्मीरियों के बच्चों का कत्ल करवाने के लिए किया है। इनमें से किसी ने भी अपना बच्चा नहीं गंवाया है और उनके परिवार का कोई सदस्य आतंकवाद में भी शामिल नहीं हुआ है।" अपनी साफगोई के लिए पहचाने वाले मलिक ने कहा कि गवर्नर बनने के बाद, "मैंने खुफिया एजेंसियों से कोई इनपुट नहीं लिया। वे हमें या दिल्ली को सच नहीं बता रहे थे।"

'युवाओं को गुमराह किया था कि मरने पर ही जन्नत मिलेगी'

'युवाओं को गुमराह किया था कि मरने पर ही जन्नत मिलेगी'

सत्यपाल मलिक ने बताया कि किस तरह से राज्य के युवाओं से उन्हें पता चला कि यहां की जमीनी हकीकत क्या थी। उनके मुताबिक, "मैंने 150 से 200 युवाओं से सीधे बात की और कॉलेज और यूनिवर्सिटी में राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं होने वालों को पहचानने की कोशिश की। मैंने उनसे बात की जिनकी उम्र 25 से 30 साल थी, उनके सपनों को कुचल दिया गया था...उन्हें गुमराह किया गया था और वे गुस्से में थे....वे हुर्रियत को नहीं चाहते, हमे या दिल्ली सरकार या ऑटोनोमी नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें यही दिखाया गया था कि शहीद होने से ही जन्नत जाया जा सकता है।" गवर्नर के अनुसार उन्होंने ऐसे युवाओं को बताया कि उनका कश्मीर तो पहले से ही जन्नत है। उन्होंने कहा कि, "मैं कश्मीर के लोगों और युवाओं से कहना चाहतू हूं कि सच्चाई को समझें। आपके पास रहने के लिए दुनिया की खूबसूरत जगह है.......आगे आएं और नए दौर का हिस्सा बनें और प्रगति एवं विकास के पथ पर आगे बढ़ें।"

....तो हर आम कश्मीरी के घर की छत सोने की होती

....तो हर आम कश्मीरी के घर की छत सोने की होती

सत्यपाल मलिक ने बताया कि शिक्षा के लिए 22,000 कश्मीरी युवा प्रदेश से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि, "उन्हें शिक्षा के लिए बाहर क्यों जाना पड़ा? इसलिए, क्योंकि उन्हें पिछले कई दशकों में प्रदेश में उपयुक्त शिक्षा की व्यवस्था नहीं मिली। कश्मीर को जितना धन दिया गया है अगर यहां के राजनेता और अफसरशाह उसका सही तरीके से इस्तेमाल करते तो आपके घर का छत सोने का होता।" इस दौरान गवर्नर ने बताया कि उन्होंने पिछले साल 53 नए डिग्री कॉलेजों की मंजूरी दी है और जल्दी ही 50 और कॉलेज खोल रहे हैं। यही नहीं रातोंरात 242 स्कूलों को भी हाइयर सेकेंडरी का दर्जा देकर अपग्रेड किया है।

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