प्रकृति प्रेमियों के लिए गुड न्यूज, हिम तेंदुआ की बढ़ रही है संख्या, जानें कैसे पता चला ?
हिमाचल के बर्फीले इलाकों में हिम तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी की रिपोर्ट आई है। इसका कारण इलाके में इनके संरक्षण के लिए लगातार किए गए प्रयास को बताया जा रहा है। दावे के मुताबिक इस समय इनकी संख्या 52 से 72 के बीच है।

यदि आपको जंगली जानवरों, खासकर विलुप्त हो रहे वन्यजीवों में दिलचस्पी है तो यह बहुत ही अच्छी खबर है। हिमाचल प्रदेश में हिम तेंदुए पर चार साल सेे शोध किया जा रहा था। अब जाकर पता चला है कि उनकी संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। इसका मतलब यह हुआ कि वहां पर उनके रहने के हालात अच्छे हो रहे हैं, जिसके चलते उनकी संख्या में इजाफा हुआ है। पिछले कुछ समय से अक्सर उनके देखे जाने की खबरें आती रही हैं। अब जाकर पता चला है कि वास्तव में उनकी आबादी बढ़ चुकी है और यह भी पता चल गया है कि इस समय हिमाचल के शीत मरुस्थलीय इलाके में कितने हिम तेंदुओं ने अपना अड्डा जमा रखा है।
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हिम तेंदुआ की बढ़ रही है संख्या-स्टडी
वन्यजीव प्रेमियों के लिए बहुत ही सुकून देने वाली खबर है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार हुए शोध में यह बात सामने आई है कि बेहद ही चालाक माना जाने वाले हिम तेंदुए की जनसंख्या बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश के आदिवासी जिले लाहौल-स्पीति और पड़ोसी किन्नौर और पांगी इलाके में यह विलुप्त हो रही प्रजाति कई बार लोगों की नजरों में भी आने लगी है। 26 दिसंबर को यह वाइल्ड कैट किब्बर इलाके के चिचम गांव में बहुत ही ऊंचाई वाले शीत मरुस्थल वाले क्षेत्र में नजर आई है। गौरतलब है कि इस इलाके में मौसम की पहली बर्फबारी से ठीक पहले इसका नजर आना अच्छा संकेत माना जा सकता है।

52 से 72 तक हिम तेंदुआ होने का अनुमान
हिमाचल प्रदेश वाइल्डलाइफ ने मैसूर स्थित नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन की मदद से पहली बार इसकी संख्या पर शोध कराया है, जिसके मुताबिक इसकी मौजूदा संख्या 52 से लेकर 72 के बीच में है। हिमाचल प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियो ने बताया है कि इस शोध को पूरा करने में चार साल लगे हैं और इसने पिछले साल ही अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस जंगली जानवर की आवाजाही मुख्य तौर पर ट्रांस-हिमालय क्षेत्र के शीत मरुस्थल वाले इलाके में ही रही है।

हाल ही में दिखे हैं 15 हिम तेंदुए-वन विभाग
शोध का मुख्य नतीजा ये है कि हिम तेंदुए (snow leopard) की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। हिमाचल प्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन राजीव कुमार का कहना है कि वन विभाग ने इस जानवर के ठिकाने की स्थिति को बेहतर करने , इकोलॉजी को सुधारने और इंसान और जानवरों के बीच होने वाले टकराव को कम करने के लिए प्रयास बढ़ा रखे हैं। अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में विभाग ने करीब 15 जानवरों को देखा है, जो पानी पीने और शिकार के लिए नीचे आते हैं। राजीव कुमार का कहना है कि हिम तेंदुए का ज्यादा दिखाई पड़ना संरक्षण और सुरक्षा समेत उनके शिकार की उपलब्धता के लिए बढ़िया संकेत है।

पर्यटक और स्थानीय लोग हिम तेंदुओं से दूर रहें- वन विभाग
वहीं लाहौल के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO)दिनेश शर्मा ने कहा कि हिम तेंदुए की संख्या पर हुए शोध में ट्रेल मैपिंग, सैटेलाइट सर्वे, साइन सर्वे के अलावा अन्य तकनीकें भी शामिल की गई हैं। उन्होंने कहा, 'यह शोध इस बात का संकेत देता है कि इस क्षेत्र में शिकार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।' उनका कहना है कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इन जंगली बिल्लियों के पीछे नहीं भागना चाहिए और उनके प्राकृतिक निवास से दूर ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा, 'उन्हें बिना उचित अनुमति के उनकी सही लोकेशन की जानकारी सोशल मीडिया और बाकी प्लेटफॉर्म पर भी साझा नहीं करनी चाहिए। उनकी तस्वीरें भी नहीं बनानी चाहिए। '
'सिक्योर हिमालयन प्रोजेक्ट' का नतीजा!
सूत्रों का कहना है कि 'सिक्योर हिमालयन प्रोजेक्ट' के तहत पर्यावरण मंत्रालय हिमाचल, प्रदेश वाइल्डलाइफ विभाग के साथ मिलकर इन जंगली जानवरों के प्राकृतिक निवास को संरक्षित बनाने के लिए स्थानीय समुदायों को साथ में लेकर एक मॉडल लागू कर रहा है। इसके तहत इलाके के लोगों को आजीविका का विकल्प भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लेकिन, जो भी हो ऐसी विलुप्त होने की कगार पर खड़ी प्रजातियों को देखना अच्छा लगता है। (कुछ तस्वीरे- सांकेतिक)












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