बसों में फ्री सफर कर सकेंगी महिलाएं, केजरीवाल सरकार जल्द लागू कर सकती है योजना
नई दिल्ली। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार जल्द ही राजधानी की महिलाओं को बड़ी सौगात देने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार डीटीसी और कलस्टर बसों में महिलाओं के फ्री सफर की योजना को लागू करने जा रही है। दिल्ली परिवहन विभाग ने महिलाओं की फ्री राइड को लेकर पूरा प्लान तैयार करके प्रदेश सरकार के पास भेज दिया है। टीओआई की खबर के मुताबिक, इस पर कैबिनेट नोट भी तैयार है। बस कैबिनेट की मंजूरी के बाद ऐसी उम्मीद है कि आने वाले चंद दिनों में ये योजना दिल्ली में शुरू कर दी जाएगी।

बसों में महिलाओं की फ्री राइड पर जल्द फैसला लेगी केजरीवाल सरकार
दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जून में महिलाओं के लिए मुफ्त मेट्रो और डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) बसों में सफर का ऐलान किया था, इसके पीछे मुख्य वजह ये थी कि महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाया जा सके। हालांकि दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की फ्री यात्रा पर सवाल खड़े होने के बाद पूरी योजना लागू होने में देरी होने लगी। दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की फ्री राइड को लेकर फैसले में देरी होते देख दिल्ली सरकार ने डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं को फ्री राइड शुरू करने को लेकर फैसला लेने में जुट गई है।

दिल्ली कैबिनेट की मंजूरी का है इंतजार
टीओआई की खबर के मुताबिक, दिल्ली कैबिनेट डीटीसी और क्लस्टर स्कीम बसों में महिलाओं के लिए जल्द ही मुफ्त यात्रा को मंजूरी दे सकती है। फ्री राइड के लिए एक खास टिकट जारी किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, ये टिकट गुलाबी रंग का होगा, जिसके लिए सरकार ऑपरेटर को 10 रुपये देगी। चाहे यात्रा की कितनी भी दूरी कि क्यों नहीं हो। इस संबंध में एक कैबिनेट नोट पहले ही तैयार किया जा चुका है और इसे कानून और वित्त विभाग को भेजा गया है।

महिलाओं के लिए जारी होगा गुलाबी टिकट
डीटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली परिवहन निगम ने योजना को लागू करने के लिए दो विकल्प सुझाए थे। पहला विकल्प महिला यात्रियों को बिना शुल्क दिए टिकट जारी करना है और दूसरा विशेष यात्रा पास जारी करना है जिसके लिए सरकार ऑपरेटरों को सब्सिडी का भुगतान कर सकती है। डीटीसी तो फ्री पास के पक्ष में है, हालांकि सरकार ने टिकट वाले सुझाव को सही माना। अधिकारी का कहना है कि इससे सरकार को हिसाब रखने में मदद मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, इस योजना को डीटीसी की बसों में लागू करने पर हर साल करीब 1200 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।












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