गलत नहीं है नीतीश का प्रधानमंत्री बनने का दावा
बेंगलुरु। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में देश के अन्य मुख्यमंत्रियों को चैलेंज किया कि जिन सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने बिहार का जितना विकास किया है, उतना कोई और करके नहीं दिखा सकता। यहां तक उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिये वो ज्यादा काबिल हैं। नीतीश के ये बयान देश में बज रहे गुजरात के विकास के डंके और केंद्र की यूपीए सरकार के भारत निर्माण के विज्ञापनों के बीच दब गई।
देश के अर्थशासत्री व सेंटर फॉर रिसर्च, दिल्ली के प्रोफेसर बिबेक देबरॉय, हाइट फेलोशिप प्राप्त लवीश भंडारी और काटो इंस्टीट्यूट के स्वामीनाथन एस अंकलेसरिया की रिपोर्ट जो बातें बयां करेगी उसके लिये आप नीतीश कुमार को शाबाशी जरूर देंगे और शायद इस लोकसभाा चुनाव में वोट भी।
इस रिपोर्ट में बिहार की इक्नॉमिक फ्रीडम पर चर्चा की गई है। हालांकि पूरी रिपोर्ट में देश के अन्य राज्यों को भी शामिल किया गया है। स्टेट रैंकिंग की टेबल में आपको गुजरात सबसे ऊपर दिखाई देगा और बिहार सबसे नीचे, लेकिन जिस गति से बिहार ने समृद्धि हासिल की है वो वाकई में देखने योग्य है।
क्या है इक्नॉमिक फ्रीडम
इक्नॉमिक फ्रीडम यानी आर्थिक स्वतंत्रता विकास का वो इंडेक्स है, जिस पर किसी राज्य या देश के विकास, वहां के लोगों की लाइफस्टाइल, सामाजिक न्याय, आदि के मामले में आगे बढ़ता है और आर्थिक समृद्धि आती है, तो उसे आर्थिक स्वतंत्रता कहा जाता है। साथ ही इसे समृद्धि के मार्ग के रूप में भी परिभाषित किया जाता है। और बिहार ने 0 से 1 के बीच के इंडेक्स में आठ सालों में जबर्दस्त छलांग मारी। 2005 में बिहार 0.25 के इंडेक्स पर था जो 2013 में ऊपर उठकर 0.31 तक पहुंच गया। नंबर-1 बनने के लिये बिहार को 0.65 अंक हासिल कर गुजरात को पछाड़ना होगा, जो आसान नहीं है।
[बिहार से जुड़े 25 रोचक तथ्य] बिहार की लंबी छलांग के कारण स्लाइडर में

जीडीपी की दर बढ़ी
नीतीश कुमार के शासन में बिहार की जीडीपी बढ़कर 11.8 प्रतिशत हो गई, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।

गरीबी दूर हुई
2005 से लेकर 2013 तक के सफर में बिहार में गरीबी 56 फीसदी से घट कर 33.74 प्रतिशत तक पहुंच गई। यानी अब बिहार गरीब राज्य नहीं रहा है।

साक्षरता दर
पिछले एक दशक में बिहार की साक्षरता दर में 16.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

सड़कें बनी
पिछले एक दशक में सबसे तेज गति से सड़कें बिहार में बनायी गईं। दूर-दराज के गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा गया।

बिहार में जंगलराज खत्म
नीतीश कुमार ने जंगलराज को खत्म करने के लिये एक दशक में करीब 80 हजार बड़े अपराधियों को जेल में डालने का काम किया। इससे छोटे अपराधियों के हौंसले खुद ब खुद नेस्तनाबूत हो गये।

निवेश बढ़ा
अपराध कम होने की वजह से बिहार में कंपनियों ने निवेश करना शुरू किया। अच्छे इंफ्रासट्रक्चर के चलते आर्थिक परिवर्तन देखने को मिले।

माओवाद व नक्सलवाद पर नियंत्रण
नीतीश कुमार के प्रयास ही हैं कि बिहार में नक्सलवाद पर नियंत्रण स्थापित हो सका है। 2001 से 2005 के बीच 1309 नक्सली वारदातें हुईं, जबकि 2006 से 2010 के बीच 514 वारदातें हुईं। मौतों की संख्या 760 से घटकर 214 हो गई।












Click it and Unblock the Notifications