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'बिना डर और शांति से जीने का मेरा अधिकार वापस दो', गुजरात सरकार से गोधरा दंगे की पीड़िता

नई दिल्ली, 17 अगस्त। गुजरात के गोधरा दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार और परिवार के सात सदस्यों की हत्या के दोषियों की रिहाई पर बिलकिस बानो ने राज्य सरकार से अपना कदम वापस लेने अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि दोषी लोगों की रिहाई ने उनके मन की शांति छीन ली और न्याय के प्रति विश्वास को हिला दिया।

'दोषियों की रिहाई ने मेरी शांति छीन ली'

'दोषियों की रिहाई ने मेरी शांति छीन ली'

गुजरात सरकार के फैसके के बाद जब दोषियों की रिहाई पर बिलकिस ने कहा "मुझे हमारे देश की सर्वोच्च अदालतों पर भरोसा था। मुझे सिस्टम पर भरोसा था, और मैं धीरे-धीरे पीड़ा के साथ जीना सीख रही थी। लेकिन दोषियों की रिहाई ने मेरी शांति छीन ली है और न्याय में मेरे विश्वास को हिला दिया है। मेरा दुख और मेरा डगमगाता विश्वास केवल मेरे लिए नहीं है, बल्कि हर उस महिला के लिए है जो अदालतों में न्याय के लिए संघर्ष कर रही है"।

'बिना डर के शांति से जीने का अधिकार दो'

'बिना डर के शांति से जीने का अधिकार दो'

दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस बानो ने पहली बार इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा "दो दिन पहले, 15 अगस्त, 2022 को पिछले 20 वर्षों के आघात ने मुझे फिर से झकझोर दिया। जब मैंने सुना कि 11 दोषी लोगों ने मेरे परिवार और मेरे जीवन को तबाह कर दिया और मेरी 3 साल की बेटी को मुझसे छीन लिया। मेरे पास अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं केवल इतना ही कह सकती हूं - किसी भी महिला के लिए न्याय इस तरह कैसे समाप्त हो सकता है? बिलकिस बानो ने कहा " मैं गुजरात सरकार से अपील करती हूं, मुझे बिना किसी डर और शांति से जीने का मेरा अधिकार वापस दें। कृपया सुनिश्चित करें कि मेरा परिवार और मुझे सुरक्षित रखा गया है"।

बिलकिस बानो केस

बिलकिस बानो केस

3 मार्च 2002 को गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के दौरान दाहोद जिले के लिमखेड़ा तालुका के रंधिकपुर गांव में भीड़ ने बिल्कीस बानो के परिवार पर हमला किया था। बिलकिस के परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बिल्किस उस समय पांच महीने की गर्भवती थीं। उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। मामले में इस मामले के आरोपियों को 2004 में गिरफ्तार किया गया था। मामले में दोषियों को मुंबई में सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। कोर्ट ने ये निर्णय 21 जनवरी 2008 को दिया था। जिसमें 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी। जिसके बाद सभी दोषी बंबई हाईकोर्ट पहुंचे थे लेकिन कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा। गोधरा दंगों को दौरान बिलकिस बानो केस के दोषियों को रिहा करते वक्त कारागार में इनके बिताए गए समय के दौरान इनके आचरण पर विचार किया गया। जिसके बाद गुजरात सरकार ने क्षमा करने के पक्ष में निर्णय लिया।

उस वक्त 21 साल की थीं बिलकिस

उस वक्त 21 साल की थीं बिलकिस

गोधरा दंगों के वक्त बिलकिस बानो ने अपने परिवार के सात सदस्यों की हत्या होते देखा। इनमें उनकी मासूम बेटी भी शामिल थी। उस दौरान पांच माह की गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। बिलकिस बानो की उम्र उस वक्त 21 साल थी।

क्षमा नीति के तहत रिहाई

क्षमा नीति के तहत रिहाई

गुजरात में गोधरा कांड के बाद 2002 सीबीआई के विशेष अदालत ने सामूहिक बलात्कार मामले में 11 दोषियों को उम्रकैद सजा सुनाई थी। ये सभी को सरकार के फैसले के बाद सभी सोमवार को गोधरा उप-कारागार में सजा काट रहे थे। स्वंत्रता दिवस के मौके पर ये सभी को सरकार के फैसले के बाद जेल से रिहा हो गए। गुजरात सरकार ने क्षमा नीति के तहत बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म और परिवार के 7 सदस्यों की हत्या के मामले में दोषियों को रिहाई की मंजूरी दी। दोषियों ने 15 साल से अधिक कैद की सजा काट ली थी। जिसके बाद सर्वोच्च अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने के बाद गुजरात सरकार से उसकी सजा पर क्षमा पर विचार करने का निर्देश दिया था।

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