जानिये क्या होता है अध्यादेश, इसकी वैधता सिर्फ 6 हफ्ते होती है

नई दिल्ली। भूमि अधिग्रहण बिल केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ जहां पूरा विपक्ष इस बिल के विरोध में खड़ा है तो वहीं दूसरी तरह मोदी सरकार हर हाल में इस बिल को विकास के एजेंडे के तहत पास कराने पर तुली है। विपक्षी दलों के विरोध के चलते केंद्र सरकार ने इस बिल को अध्यादेश के रास्ते पास कराया था।

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अध्यादेश शब्द आजकल काफी चर्चा में भी है लेकिन बहुत कम लोगों को इसके बारे में जानकारी है। दरअसल किसी कानून को जब सरकार आपात स्थिति में पास कराना चाहती है लेकिन उसे अन्य दलों का समर्थन उच्च सदन में प्राप्त नहीं हो रहा है तो सरकार अध्यादेश के रास्ते इस पास करा सकती है।

अध्यादेश की अवधि 6 हफ्ते होती है, जिसे केंद्र सरकार राष्ट्रपति के पास पास करने के लिए भेजते हैं। लेकिन अध्यादेश को 6 हफ्ते के भीतर फिर से संसद के पास वापस आ जाता है। इसके बाद फिर से इसे सामान्य बिल के तौर पर सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।

गौरतलब है कि 1952 से 2014 के बीच 668 बार अध्यादेश जारी किये गये हैं। वहीं 1967 से 1981 के बीच बिहार में 256 अध्यादेश जारी हुए जबकि विधानसभा ने 189 कानून ही बनाए। वहीं यह चौंकाने वाली बात यह है कि 18 जनवरी 1986 को बिहार के राज्यपाल जगन्नाथ कौशल ने एक दिन में 58 अध्यादेश जारी किया था।

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