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जानिये एनजीओ के नाम पर चलने वाली देशद्रोही संस्थाओं का काला सच

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने भारत में एनजीओं को विदेशों से मिलने वाले चंदे को लेकर काफी गंभीर नजर आ रही है। भारत की खुफिया एजेंसी ने कई ऐसी एनजीओ के नाम और उनके खिलाफ सबूत सरकार को सौंपे हैं जो विदेशी चंदे की आड़ में देश की छवि को दुनिया में बर्बाद करने का काम कर रही हैं।

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फोर्ड फाउंडेशन पर सरकार की कड़ी नजर

केंद्र सरकार के निशाने पर आने वाली पहली एनजीओ ग्रीनपीस है। इस एनजीओ का गृहमंत्रालय ने लाइसेंस रद्द कर एनजीओ को नोटिस भेजा कि उसने अभी तक अपने चंदे के बारे में सरकार को जानकारी क्यों नहीं दी। यही नहीं इसके बाद फोर्ड फाउंडेशन पर भी केंद्र सरकरा ने कड़ी निगरानी शुरु कर दी है।

देश में ये एनजीओ जो गरीबों के जीवन स्तर को उपर उठाने और उनकी जीविका के लिए काम कर रही हैं। लेकिन क्या वाकई में इन एनजीओ का मुख्य उद्देश्य गरीबों के लिए ही काम करना है या कोई और इसपर सरकार जांच कर रही है।

सरकार ने 140 संस्थाओं को जारी की चेतावनी

केंद्र सरकार ने 140 एनजीओ को कई बार चेतावनी दी कि अपने चंदे की जानकारी सरकार को मुहैया कराये लेकिन इन सभी चेतावनियों को इन एनजीओ ने नजरअंदाज कर दिया। लेकिन सरकार इन एनजीओ के वास्तविक एजेंडे की जांच के लिए काफी सख्त नजर आ रही है।

एक तरफ जहां सरकार ने ग्रीनपीस पर भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रही थी जिसके चलते उसपर पाबंदी लगायी गयी थी। लेकिन फोर्ड मामले में पर सरकार का कहना है कि वह फोर्ड फाउंडेशन पर सिर्फ नजर रख रही है।

संस्थाओं पर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का शक

सरकार का कहना है कि वह फोर्ड को मिलने वाली राशि के बारे में जानना चाहती है। अगर फोर्ड के जरिए देश में सही तरीके से पैसा आ रहा है तो हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जिस तरह से इस संस्था ने अभी तक अपने चंदे के बारे में जानकारी नहीं दी है तो हम उसपर नजर रख रहे हैं।

अमेरिका की सीआईए के लिए काम करती है फोर्ड

आपको बता दें कि अमेरिका में कांग्रेस की जांच में 1976 में संस्थाओं को तकरीबन 700 लोगों से चंदे हासिल हुए जिसमें से 50 फीसदी गलत पाये गये थे। सीआईए ने अपनी जांच में पाया कि ये फंडिंग अंतर्राष्ट्रीय संगठन अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दे रहे थे।

यही नहीं सीआईए ने फोर्ड फाउंडेश को सबसे बड़ा फंड देने वाली संस्था बताया था। वहीं इस बात का भी खुलासा हुआ था कि फोर्ड सीआईए के लिए ही काम करती है। ऐसे कई मामले सामने आये हैं जिसमें फोर्ड फाउंडेशन ने कई बार डोनेशन दिये थे।

फ्रांस की एक पत्रकार स्टोनर सॉडर्स ने सीआईए के बारे में लिखा था कि सीआईए इन एनजीओ के जरिए देश में जासूसी कर रही है। उन्होंने लिखा था कि फोर्ड फाउंडेशन और रॉकफेलर फाउंडेशन अमेरिका का ही एक तंत्र है जिसका अमेरिका अपने हितों के लिए इस्तेमाल करता है और इसके सदस्य अमेरिका के आला अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं।

एनजीओ नहीं दे रही चंदे की सही जानकारी

गृहमंत्रालय का कहना है कि फोर्ड फाउंडेशन पर इसलिए नजर रखी जा रही है कि इसने अभी तक अपने चंदे की जानकारी नहीं दी है। यही नहीं अनिवार्य दस्तावेजों को भी इस संस्था ने अभी तक जमा नहीं किये हैं।

गुजरात सरकार ने सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाया

पिछले महीने गुजरात सरकार ने गृहमंत्रालय से फोर्ड फाउंडेशन के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा था। गुजरात सरकार का आरोप था कि यह संस्था प्रदेश के मामलों में दखल दे रही है। यही नहीं प्रदेश सरकार ने आरोप लगाया था कि यह संस्था तीस्ता सीतलवाड़ की संस्था की मदद से गुजरात का सांप्रदायिक माहौल खराब करना चाहती है।

सरकार ने फोर्ड के चंदे पर लगायी रोक

सरकार ने दो महीने पहले फोर्ड फाउंडेशन के लिए विदेश से आने वाली 5 मिलियन डॉलर की राशि पर भी रोक लगा दी थी। सरकार का मानना है कि ज्यादातर चंदा देश के खिलाफ हो रही हरकतों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

केजरीवाल को भी 4 लाख डॉलर का मिला था चंदा

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल की संस्था कबीर को भी फोर्ड फाउंडेशन ने 4 लाख डॉलर का चंदा दिया था। ऐसे में फोर्ड फाउंडेशन पर उठ रहे सवाल इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कहीं यह संस्था देशविरोधी कामों को तो बढ़ावा नहीं दे रही है।

फोर्ड का दावा हमने कुछ भी गलत नहीं किया

वहीं इन सब पर फोर्ड फाउंडेशन का कहना है कि सरकार हमारी द्वारा दी जाने वाली संस्थाओं की राशि के बारे में जानना चाहती है। संस्था का कहना है कि हमें मंत्रालय ने अभी तक संपर्क नहीं किया है ना ही हमसे कोई जानकारी मांगी है। साथ ही फोर्ड का कहना है कि हम अतंर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करते हैं।

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