रूस-यूक्रेन संकट पर भारत के रिएक्शन की जर्मन राजदूत ने की तारीफ, बोले- 'वे जानते हैं क्या करना है'
नई दिल्ली, 06 मार्च। यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग को दो सप्ताह होने जा रहे हैं, लेकिन अभी भी युद्ध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। इस बीच दुनिया के कई देश राष्ट्रपति व्लादिमीर के आक्रामक रवैये को देखते हुए रूस पर कई वैश्विक प्रतिबंध लगा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत इस मुद्दे पर कूटनीतिक कदम के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत के रिएक्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली में जर्मन राजदूत वाल्टर जे लिंडनर ने रविवार को भारत की कूटनीतिक सेवा की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत को पता है क्या करना है।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार जर्मन दूत वाल्टर ने कहा, 'भारत के पास उत्कृष्ट राजनयिक सेवा है, वे जानते हैं कि क्या करना है ... यह यूक्रेन या यूरोपीय संघ या नाटो के बारे में नहीं है ... यह वैश्विक विश्व व्यवस्था के बारे में है। हम सभी को चाहिए कि इसके खिलाफ एक साथ खड़े हों।' लिंडनर ने ये टिप्पणी उस सवाल का जवाब देते हुए की जिसमें उनसे पूछा गया था कि यूरोपीय संघ वैश्विक मामले में भारत की भूमिका को कैसे देखता है?
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उन्होंने आगे कहा, वैश्विक व्यवस्था देखें, क्या हम चाहते हैं कि एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक पड़ोसी पर इस तरह का व्यापक, आक्रामक हमला किसी खेल का नियम होना चाहिए? यह भविष्य में हर विवादित सीमा के लिए हिंसा का सहारा लेने के लिए एक मिसाल कायम करेगा। इसलिए हम सभी को पुतिन के खिलाफ एक साथ खड़ा होना होगा और 'नो पुतिन, स्टॉप इट' कहना होगा।
मालूम हो कि भारत और 34 अन्य देशों ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया जिसमें यूक्रेन के खिलाफ रूस की सैन्य कार्रवाई को लेकर उसकी निंदा की गई थी। भारत ने इससे पहले यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र का आह्वान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रक्रियात्मक मतदान में भाग नहीं लिया था। चीन और संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत ने पिछले हफ्ते यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अमेरिका द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव से परहेज किया था।












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