Gaumutra Controversy: 'मजबूत बने रहें', गौमूत्र पर IIT मद्रास के डायरेक्ट के बचाव में उतरे Zoho CEO
Gaumutra Controversy: IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ( IIT Madras Director V Kamakoti) ने हाल ही में एक कार्यक्रम में गौमूत्र की तारीफ की थी। जिसके बाद उनके बयान से विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि एक संन्यासी ने बुखार ठीक करने के लिए डॉक्टर के पास जाने की बजाय गौमूत्र का सेवन किया, जिससे उनका बुखार महज 15 मिनट में ठीक हो गया।
वी.कामकोटि ने गौमूत्र को 'महत्वपूर्ण औषधि' बताया और इसके एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल गुणों और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम(IBS) जैसी बीमारियों में इसके उपयोग का जिक्र किया। हालांकि उनके इस बयान ने नए विवाद को जन्म दे दिया।

Gaumutra Controversy: ज़ोहो के सीईओ का IIT डायरेक्टर को समर्थन
अब इस बयान के बाद जहां एक ओर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया, वहीं जोहो कॉर्पोरेशन के सीईओ श्रीधर वेम्बू उनके बचाव में उतर आए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, "आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. कामकोटि एक कुशल शोधकर्ता और शिक्षक हैं। उन्होंने अपने बयान के समर्थन में वैज्ञानिक शोधपत्रों का हवाला दिया है। आधुनिक विज्ञान अब पारंपरिक ज्ञान के मूल्य को तेजी से पहचान रहा है।"
इसी के साथ उन्होंने आगे कहा कि आलोचना करने वाली ऑनलाइन भीड़ केवल अपने पूर्वाग्रहों पर आधारित है, किसी वैज्ञानिक तथ्य पर नहीं। प्रोफेसर कामकोटी, मजबूत बने रहें। हमलावर भीड़ के आगे न झुकें।
'गौमूत्र कोई अंधविश्वास नहीं'
एक अलग पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने गौमूत्र पर की जाने वाली आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे "अवैज्ञानिक सोच" का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान अब पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने मल प्रत्यारोपण और आंतों के बैक्टीरिया के महत्व का उदाहरण देते हुए कहा, "जो लोग गौमूत्र का मजाक उड़ा रहे हैं, वे यह नहीं जानते कि किस तरह स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्वस्थ आंत बैक्टीरिया को बहाल करने के लिए मल प्रत्यारोपण जैसी प्रक्रियाओं का सहारा ले रहे हैं। इसी तरह गौमूत्र और गोबर के लाभकारी गुण कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सत्य हैं।"
जानिए IIT मद्रास के डायरेक्टर ने क्या कहा था?
दरअसल, आईआईटी मद्रास के निदेशक माटू पोंगल पर गो संरक्षण शाला कार्यक्रम में बोल रहे थे, जब उन्होंने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "एक संन्यासी को बुखार हुआ, और उन्हें डॉक्टर को बुलाने का विचार सुझाया गया... मैं उस संन्यासी का नाम भूल गया हूं। उन्होंने तुरंत कहा कि वे गौमूत्र पीएंगे। इसे तुरंत लाया गया, और उन्होंने इसे आसानी से पी लिया। बुखार 15 मिनट के भीतर गायब हो गया।"
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उन्होंने आगे बताया था कि, गौमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के साथ कई औषधीय लाभ हैं। यह ना केवल पाचन संबंधी समस्याओं, बल्कि IBS जैसी स्थितियों के लिए भी मददगार है।"
उन्होंने अपने दावों को वैज्ञानिक शोधपत्रों से प्रमाणित किया। जिन शोधपत्रों का उल्लेख किया गया, उनमें शामिल हैं:
"गाय के मूत्र में पेप्टाइड प्रोफाइलिंग" (नेचर पत्रिका में प्रकाशित)।
"गाय के मूत्र के संक्रमणरोधी और कैंसररोधी गुण" (अमेरिकी पेटेंट)।
"गौमूत्र की समीक्षा" (एशियन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च)।
"गाय के मूत्र की कीमोथेरेप्यूटिक क्षमता" (जर्नल ऑफ इंटरकल्चरल एथनोफार्माकोलॉजी)।
हालांकि उनके इस बयान की कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने आलोचना की है, जबकि तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने इसका बचाव किया है।












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