Galgotias वाली प्रोफेसर नेहा सिंह की नौकरी क्या सच में चली गई? यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब तोड़ी चुप्पी
Galgotias Professor Neha Singh: दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट में शुरू हुआ गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर शुरू हुआ विवाद देश से लेकर चीन तक चर्चा का विषय बन चुका है। विवाद तब खड़ा हुआ जब यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर प्रदर्शित चीनी रोबोटिक डॉग को स्वदेशी बताया गया। इस पूरे विवाद के दौरान चर्चा में रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह।
नेहा सिंह वायरल वीडियो में चाइनीज रोबोटिक डॉग यूनिवर्सिटी का एआई प्रोडक्ट बता रही थीं। हालांकि बाद में वो मुकर गईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है कि क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह को नौकरी से हटा दिया गया है। असल में नेहा सिंह ने अपने लिंक्डइन बॉयो में "Open to Work" लिखा है, जिसके बाद चर्चा होने लगी कि उनकी नौकरी चली गई है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौड़ ने बताई सच्चाई?
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौड़ ने कहा कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हां, मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित फैकल्टी को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। यानी फिलहाल नौकरी जाने की खबर की पुष्टि नहीं हुई है। रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौड़ ने साफ-साफ कहा कि उनकी नौकरी पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है। हमने उनको जवाब के लिए नोटिस जारी किया है।
यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा पर उन्होंने कहा, "उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया है और उन्हें फिलहाल यहीं रहने के लिए कहा गया है। जब तक यह पूरी जांच नहीं हो जाती कि ऐसी गलती क्यों और कैसे हुई, तब तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। एक व्यक्ति की गलती के कारण पूरे विश्वविद्यालय पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। हम भी भारत के नागरिक हैं और निश्चित रूप से चाहते हैं कि हमारा देश आगे बढ़े।"
उन्होंने साफ किया कि विश्वविद्यालय ने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोट पूरी तरह उसका खुद का आविष्कार है। उनके मुताबिक रोबोट को रिसर्च और डेवलपमेंट के उद्देश्य से खरीदा गया था ताकि छात्र मौजूदा वैश्विक तकनीक को समझ सकें।
उन्होंने कहा कि 'डेवलप' और 'डेवलपमेंट' जैसे शब्दों के इस्तेमाल में भ्रम हुआ। तकनीकी जानकारी देने के लिए विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन मीडिया बाइट संबंधित प्रोफेसर से ली गईं, जिन्हें पूरी तकनीकी जानकारी नहीं थी। इसी कारण संदेश गलत गया।
रिसर्च के लिए खरीदा गया था रोबोट
प्रशासन के मुताबिक रोबोट विश्वविद्यालय के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लॉक में रखा गया है और छात्र उस पर रिसर्च कर रहे हैं। इसे एक भारतीय कंपनी के जरिए खरीदा गया, जिसने संभवतः इसे विदेश से आयात किया होगा। यूनिवर्सिटी का कहना है कि दुनिया भर में इस्तेमाल हो रही तकनीक को समझना और उससे बेहतर समाधान विकसित करना ही उद्देश्य है। डॉ. गौड़ ने यह भी कहा कि एक घटना के आधार पर पूरे संस्थान और छात्रों की मेहनत पर सवाल उठाना उचित नहीं।
अब जानिए AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर क्या हुआ था?
एआई समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से 'ओरियन' नाम से एक रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया गया। मीडिया इंटरव्यू के दौरान प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद प्रोफेसर नेहा सिंह ने इसे यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित बताया। इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट असल में चीन की कंपनी Unitree Robotics का मॉडल 'Unitree Go2' है।
जैसे ही यह दावा वायरल हुआ, विवाद तेज हो गया। विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाए और चीनी मीडिया में भी इस खबर को जगह मिली। मामला विश्वविद्यालय की साख से जुड़ गया।
कौन हैं नेहा सिंह? (Who is Neha Singh)
नेहा सिंह गलगोटिया यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन विभाग की हेड हैं। वह कोर टेक्निकल फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं। नवंबर 2023 से वह यहां असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इससे पहले वह शारदा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीकॉम और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से एमबीए किया है। उनका फोकस कम्युनिकेशन, पर्सनालिटी डेवलपमेंट और स्टेज प्रेजेंस पर रहा है। खुद उन्होंने अपने प्रोफाइल में संवाद को अपनी पहचान बताया है।
एआई समिट में शब्दों की चूक से उपजा विवाद अब संस्थान की छवि तक पहुंच गया है। विश्वविद्यालय ने गलती स्वीकार करते हुए स्पष्टीकरण दे दिया है और भविष्य में सावधानी बरतने की बात कही है। फिलहाल इतना साफ है कि प्रोफेसर नेहा सिंह को हटाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।












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