बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, 30 लाख फर्जी फॉर्म भरे गए

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    Beti Bachao, Beti Padhao के नाम पर हुआ बड़ा फर्जीवाडा, भरे गए 30 लाख फर्जी फॉर्म | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को गरीबों के साथ बड़े स्तर पर हो रही धोखाधड़ी को रोकने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग को प्रधानमंत्री मोदी के चर्चित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी फॉर्म का आवेदन मिल रहा है। इस वर्ष विभाग को 30 लाख फर्जी फॉर्म का आवेदन मिला है। इस योजना के तहत आप अगर फॉर्म भर देते हैं तो आप दो लाख रुपए की मदद के लिए योग्य हो जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इस योजना के तहत ऐसा नहीं होता है, लिहाजा जानकारी के अभाव में लोग बड़ी संख्या में इन फॉर्म का आवेदन कर रहे हैं।

    लोगों को नहीं है सही जानकारी

    लोगों को नहीं है सही जानकारी

    इस वर्ष जो 30 लाख फर्जी फॉर्म विभाग को प्राप्त हुए हैं उनमे सबसे अधिक उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि अक्टूबर-नवंबर माह में सबसे अधिक फर्जी फॉर्म का आवेदन हिमाचल प्रदेश से किया गया है। वहीं पंजाब से भी बड़ी संख्या में फर्जी आवेदन विभाग को प्राप्त हुए हैं। दिल्ली स्थित महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के गोदाम में बड़ी संख्या में इन फॉर्म की बोरियां भरी पड़ी है। विभाग को यह सभी फॉर्म बावजूद तमाम प्रचार के बाद प्राप्त हुए हैं कि इस योजना के तहत दो लाख रुपए की नगद राशि नहीं प्राप्त होती है। लोगों को इस बात की जानकारी देने के लिए विभाग ने सोशल मीडिया सहित तमाम माध्यमों से इसका प्रचार किया, लेकिन इन तमाम जानकारियों के बावजूद लोग बड़ी संख्या में इस योजना के तहत आवेदन कर रहे हैं।

    20-50 रुपए में बेचे जा रहे फॉर्म

    20-50 रुपए में बेचे जा रहे फॉर्म

    विभाग के अनुसार यह फॉर्म लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए कुछ लोग 20-50 रुपए में बांट रहे हैं। गरीबों को यह बताया जाता है कि इस फॉर्म को भरने से आपको दो लाख रुपए की नगद राशि को प्राप्त करने के योग्य हो जाते हैं। जिसके चलते लोग अपनी तमाम व्यक्तिगत जानकारी भरकर, फोटो लगाकर, बैंक व आधार नंबर की जानकारी चस्पा करके इन फॉर्म को भरते हैं और विभाग को भेज देते हैं।

    हाई लेवल बैठक करने पड़ी

    हाई लेवल बैठक करने पड़ी

    स्थिति कुछ इस कदर बिगड़ चुकी है कि इस समस्या के निदान के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को, कानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय व आईबी के साथ बैठक करनी पड़ी। पिछले महीने इस मुसीबत का समाधान करने के लिए बैठक की गई। इससे पहले विभाग ने यह फॉर्म उन राज्यों को भेजे थे और इन सभी फॉर्म को डंप करने का फैसला लिया है। इससे पहले मंत्रालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी, बावजूद इसके फॉर्म के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है।

    पोस्टमास्टर को जागरूक किया गया

    पोस्टमास्टर को जागरूक किया गया

    यह तमाम फॉर्म स्पीड पोस्ट और जनरल पोस्ट से विभाग को भेजे गए हैं, विभाग ने इस समस्या के बारे में राज्यों के पोस्टमास्टर्स को भी अवगत कराया है। मीडिया के द्वारा प्रचार के दौरान विभाग ने लोगों को इस बाबत जानकारी दी है कि वह अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी भी जालसाज के साथ साझा नहीं करें।

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