J&K पर मोदी सरकार के फैसले को महाराजा हरि सिंह के बेटे का समर्थन, केंद्र को दी ये सलाह

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले को लेकर डॉक्टर कर्ण सिंह ने गुरुवार को एक लंबा-चौड़ा लिखित बयान जारी किया है। उन्होंने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि वे इसकी आंख मूंद कर निंदा करने का समर्थन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा है कि इसमें ढेर सारे सकारात्मक पहलू हैं। गौरतलब है कि कर्ण सिंह कांग्रेस नेता हैं और उनकी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसका विरोध किया है। डॉक्टर कर्ण सिंह का बयान काफी अहमियत रखता है कि वे जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के बेटे हैं, जिन्होंने अपनी रियासत का भारत में विलय किया था। हालांकि कर्ण सिंह ने सरकार की कार्रवाई की तारीफ करते हुए कुछ सलाह भी दिए हैं।

इन मुद्दों पर सरकार का समर्थन

इन मुद्दों पर सरकार का समर्थन

कर्ण सिंह ने लद्दाख को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। कर्ण सिंह का दावा है कि खुद सदर-ए-रियासत रहते हुए 1965 में उन्होंने भी यह प्रस्ताव दिया था। उनके मुताबिक तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रदेश के पुनर्गठन की बात रखी थी। सिंह ने आर्टिकल 35ए समाप्त किए जाने का भी समर्थन किया है, क्योंकि यह प्रावधान लिंगभेद पर आधारित था। क्योंकि, इससे पश्चिमी पाकिस्तान के लाखों शर्णार्थियों को लाभ मिलेगा और अनुसूचित जनजातियों को भी आरक्षण मिल सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने इलाके में पहलीबार परिसीमन के फैसले की भी तारीफ की है, जिससे जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में राजनीतिक सत्ता का सही विभाजन हो सकेगा।

इस मुद्दे पर सरकार को दी है सलाह

इस मुद्दे पर सरकार को दी है सलाह

उन्होंने सरकार से ये भी मांग की है कि राज्य में राजनीतिक संवाद जारी रहनी चाहिए। उन्होंने पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को भी पूरी तरह से खारिज नहीं करने की सरकार को सलाह दी है। क्योंकि, ये पार्टियां केंद्र और राज्य की सरकारों में भी रह चुकी हैं। इसलिए, इन दोनों दलों के नेताओं को रिहा करके उनको और सिविल सोसाइटी के लोगों को अचानक बदली परिस्थितियों में बातचीत का मौका दिया जाना चाहिए।

सरकार से ये है मांग

सरकार से ये है मांग

कर्ण सिंह ने सरकार से ये फी मांग की है कि जम्मू और कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा देने की कोशिश होनी चाहिए, ताकि वहां के लोग भी देश के बाकी हिस्सों की तरह राजनीतिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। गौरतलब है कि राज्य के पुनर्गठन के तहत उसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नाम से दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है। इसमें जम्मू-कश्मीर में विधानसभा तो है, लेकिन दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह वह पूर्ण राज्य नहीं रह गया है।

कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका

कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका

अपने ताजा और विस्तृत इस बयान के बाद कर्ण सिंह कांग्रेस के उन तमाम युवा और वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अभी सरकार के साथ खड़े हैं। गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी, युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, दीपेंदर हुड्डा, आरपीएन सिंह भी इस मसले पर सरकार के समर्थन में बोल चुके हैं। यही नहीं राज्यसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप भुवनेश्वर कालिता तो इसी बात पर संसद सदस्यता तक छोड़ चुके हैं। गौरतलब है कि इस मसले पर शुक्रवार को कांग्रेस में सीडब्ल्यूसी की बैठक भी होने वाली है।

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