'सामाजिक मूल्यों को बचाने के लिए हस्तक्षेप करें राष्ट्रपति मुर्मू', समलैंगिक विवाह के खिलाफ पूर्व IPS-जज
समलैंगिक शादियों के लिए कानूनी मान्यता की मांग वाली याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है। ऐसे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेटर लिखकर सामाजिक मूल्यों को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट एक तरफ समलैंगिक शादियों (Same-Sex Marriage)के लिए कानूनी मान्यता की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्व न्यायाधीशों, पूर्व आईपीएस अधिकारियों और पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ओपन लेटर लिखा है। जिसमें उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक सिद्धांतों और सामाजिक मूल्यों को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
कहा कि अगर हम समलैंगिक यौन संघ तर्कसंगत, स्वीकार्य या नैतिक बनाने के लिए कानून को संशोधित करते हैं, तो यह समलैंगिक यौन संस्कृति के द्वार खोल देगा। लेटर में आगे कहा गया कि हमारा समाज और संस्कृति समलैंगिक संबंध वाली प्रथा को स्वीकार नहीं करता है, क्योंकि यह तर्कहीन और अप्राकृतिक होने के अलावा हमारे मूल्यों के लिए अपमानजनक है।
'परिवार' और 'समाज' की प्रथा को तोड़ देगा
भारत यह बर्दाश्त नहीं कर सकता है कि उसकी आने वाली पीढ़ियां ऐसे माहौल में रहें, जो निश्चित रूप से अधिक 'गे' और 'लेस्बियन' पैदा करेगा। इसके साथ ही 'परिवार' और 'समाज' की प्रथा को तोड़ देगा। वे अपने माता-पिता, पूर्वजों संस्कृति, धार्मिक सिद्धांत और सदियों पुराने मूल्य के बारे में नहीं जानेंगे।
लेटर में यह भी लिखा गया कि यह व्यापक रूप से सराहना की जाती है कि समलैंगिक संबंध दीर्घकालिक या स्थिर नहीं बन सकते हैं। अगर उन्हें बच्चों को गोद लेने की अनुमति दी जाती है, तो वे अपने परिवारों, माता-पिता, रिश्तेदारों और भागीदारों के साथ स्थिर और लंबे समय तक चलने वाले संबंध नहीं बना सकते हैं। ऐसे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ गंभीर रूप से समझौता किया जाएगा।












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