लोन घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, ICICI बैंक की पूर्व CEO चंदा कोचर और उनके पति गिरफ्तार
ICICI-वीडियोकॉन ऋण धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति को गिरफ्तार कर लिया है।

ICICI-वीडियोकॉन ऋण धोखाधड़ी मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक को सीबीआई ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। चंदा कोचर पर वीडियोकॉन समूह के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत को ऋण देने के लिए आईसीआईसीआई बैंक में अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था।
जानकारी के मुताबिक वेणुगोपाल धूत ने आईसीआईसीआई बैंक से 3,250 करोड़ रुपए का ऋण प्राप्त करने के बाद कथित तौर पर नूपावर रिन्यूएबल्स में करोड़ों का निवेश किया था। चंदा कोचर और उनके पति के खिलाफ आरोप पत्र दायर करते हुए सीबीआई ने कहा था कि आरोपियों ने आईसीआईसीआई बैंक को धोखा देने के लिए अन्य लोगों के साथ आपराधिक साजिश में निजी कंपनियों को कुछ ऋण स्वीकृत किए थे।
आपको बता दें कि इससे पहले इस मामले में चंदा कोचर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। करोड़ों रुपए के इस घोटाले की जांच शुरू होते ही चंदा कोचर को 2018 में आईसीआईसीआई बैंक में अपने पद से हटना पड़ा था। हालांकि, चंदा कोचर ने अपने और पति के ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
मामले में 2019 में ईडी ने चंदा कोचर, उनके पति और धूत के आवासों व कार्यालयों पर छापा मारा था। वहीं, पिछले महीने ईडी ने इस मामले में वेणुगोपाल धूत से पूछताछ भी की थी। कोचर पर आरोप लगाया गया है कि 1 मई, 2009 को बैंक के सीईओ के रूप में कार्यभार संभालने के बाद धूत ने अपनी फर्म सुप्रीम एनर्जी के माध्यम से आईसीआईसीआई बैंक द्वारा मंजूर किए गए ऋणों के बदले में नूपावर रिन्यूएबल्स में निवेश किया था।
इधर, मामले की जांच कर रही सीबीआई ने पाया है कि 1,875 करोड़ के छह ऋण वीडियोकॉन समूह और संबंधित कंपनियों को जून 2009 और अक्टूबर 2011 के बीच आईसीआईसीआई बैंक की निर्धारित नीतियों के कथित उल्लंघन में स्वीकृत किए गए थे। साथ ही सीबीआई ने कहा कि ऋण को 2012 में गैर-निष्पादित संपत्ति घोषित किया गया था, जिससे बैंक को 1,730 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
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