पूर्व सेना प्रमुख ने मणिपुर हिंसा के पीछे बताया चीन का हाथ, कहा-विदेशी एजेंसियां कर रही हैं मदद
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने शुक्रवार को कहा कि मणिपुर हिंसा में विदेशी एजेंसियों की संलिप्तता को नकारा नहीं जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि, विभिन्न विद्रोही समूहों को चीन की ओर से मदद दी जा रही है। नरवणे ने कहा कि सीमावर्ती राज्यों में अस्थिरता देश की समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
पूर्व सेना प्रमुख इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिप्रेक्ष्य' विषय पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा पर सवालों का जवाब दे रहे थे।

नरवणे ने कहा कि, मुझे पूरा यकीन है कि जो लोग जिम्मेदार पदों पर आसीन हैं और आवश्यक कार्रवाई करने की जिनकी जवाबदेही है, वे बेहतर ढंग से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि, मणिपुर हिंसा में विदेशी एजेंसियों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। एक और बात जो मैं खासतौर पर कहूंगा कि विभिन्न उग्रवादी संगठनों को चीन की ओर से सहायता मिलती है। उग्रवादी संगठनों को चीन की मदद कई वर्षों से मिल रही है और यह अब तक जारी है।
पूर्वोत्तर राज्य में चल रही मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर नरवणे ने कहा कि पूर्वोत्तर में नशीले मादक पदार्थों की तस्करी बहुत लंबे समय से हो रही है और बरामद की गई नशीले मादक पदार्थों (ड्रग) की मात्रा पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है।
उन्होंने कहा, 'हम गोल्डन ट्राइएंगल (वह क्षेत्र जहां थाईलैंड, म्यांमार और लाओस की सीमाएं मिलती हैं) से थोड़ी ही दूर हैं। म्यांमार में हमेशा अव्यवस्था और सैन्य शासन रहा है। म्यांमार के सबसे अच्छे समय में भी वहां केवल मध्य म्यांमार में सरकार का नियंत्रण था। सीमाएं चाहे वह भारत के साथ जुड़ती हो या चीन के साथ या थाईलैंड के साथ, वहां सरकार का नियंत्रण बहुत कम रहा है। इसलिए नशीले मादक पदार्थों की तस्करी हमेशा से होती रही है।
पूर्व सेना प्रमुख ने आगे कहा कि, संभवतः हिंसा के खेल में कुछ विदेशी एजेंसियां शामिल होंगी जिन्हें इसका लाभ मिल रहा होगा और जो नहीं चाहेंगे कि स्थिति सामान्य हो क्योंकि जब यह अस्थिरता रहेगी, तो उन्हें लाभ होगा। यही वजह है कि लगातार प्रयासों के बावजूद भी वहां हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रही है। मुझे यकीन है कि इस पर काबू पाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार प्रयास कर रही हैं।
जनरल (सेवानिवृत्त) नरवणे से सेना भर्ती योजना अग्निपथ, भारतीय रक्षा क्षेत्र में पुनर्गठन और गलवान घाटी में चीन-भारत झड़प से संबंधित कई सवाल भी पूछे गए। अग्निपथ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि यह अच्छी योजना है या नहीं। अग्निपथ को काफी विचार-विमर्श के बाद लॉन्च किया गया था। कई लोग कहते हैं कि इसे वित्तीय और आर्थिक कारणों से लॉन्च किया गया था। इसका भी असर होने वाला है लेकिन तथ्य यह है कि हमें एक युवा सेना की जरूरत है।












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