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आंध्र पहला प्रदेश जहां होगी 3 राजधानी, 5 डिप्टी CM बनाकर पहले ही रच चुकी है कीर्तिमान!

बेंगलुरू। आंध्र प्रदेश भारत का पहला और इकलौते ऐसे प्रदेश में शुमार हो गया हैं, जहां प्रदेश सरकार ने 5 उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया था, लेकिन अब वहां की सरकार ने प्रदेश की 3-3 राजधानी बनाकर पुराने से सभी रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। हालांकि डिप्टी सीएम के मामले में उत्तर प्रदेश एक अपवाद हैं, जहां अभी दो-दो डिप्टी सीएम नियुक्त किए गए हैं।

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30 मई, 2019 को आंध्र प्रदेश की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने हाल ही में विधानसभा में प्रदेश में तीन अलग-अलग राजधानी होने का ऐलान किया था और गत सोमवार को तीन राजधानी वाले फार्मूले को विधानसभा से मंजूरी भी मिल गई। इस तरह अब आंध प्रदेश में अमरावती, विशाखापट्टनम और कुरनूल के राजधानी बनने के रास्ता साफ हो गया है।

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आंध्र प्रदेश विधानसभा की मंजूरी के बाद प्रदेश में जिन तीन राजधानी को विकसित करने का फार्मूला तैयार हुआ है। उनमें अमरावती को विधायी राजधानी को ओहदा दिया गया है जबकि कुरनूल को न्यायिक राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा जबकि विशाखापट्टनम को कार्यकारी राजधानी होगा, जहां खुद मुख्यमंत्री का ऑफिस होगा।

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भले ही भारत के किसी प्रदेश में यह पहली बार हुआ, लेकिन अफ्रीकी राष्ट्र दक्षिण अफ्रीका में भी तीन-तीन राजधानियां हैं। फिलहाल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी हैदराबाद है। जगन मोहन रेड्डी के फैसले के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल टीडीपी नेता व पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु ने एतराज किया है और फैसले को मूर्खतापूर्ण करार दिया है।

सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए तीन राजधानी के फॉर्मूले को दी गई मंजूरी

सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए तीन राजधानी के फॉर्मूले को दी गई मंजूरी

मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी तीन राजधानी को सत्ता का विकेंद्रीकरण बताकर देर से लिया गया फैसला करार दिया है। इससे पहले जगन मोहन रेड्डी के प्रदेश में पांच-पांच उप मुख्यमंत्री नियुक्त करने के फैसले ने भी खूब सुर्खियां बंटोरी थी। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने पांच उप मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने के पीछे तर्क दिया था कि ऐसा करके प्रदेस के सभी जातियों का संतुलन बनाया जा सकेगा। मालूम हो, आंध्र प्रदेश में नियुक्त किए गए पांचों उप मुख्यमंत्री क्रमशः अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू समुदायों से हैं।

विशाखापट्टनम, कूरनूल और अमरावती होंगी आंध्र प्रदेश की राजधानी

विशाखापट्टनम, कूरनूल और अमरावती होंगी आंध्र प्रदेश की राजधानी

आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित तीनों राजधानी में से एक विशाखापट्टनम उत्तरी तटीय आंध्र में अवस्थित है जबकि दूसरी राजधानी अमरावती मध्य आंध्र में अवस्थित है और तीसरी राजधानी कूरनूल रायलसीमा आंध्र में अवस्थित है। मुख्यमंत्री रेड्डी के मुताबिक विशाखपत्तनम एग्जीक्यूटिव कैपिटल, कर्नूल को ज्यूडिशियल कैपिटल और अमरावती को लेजिस्लेटिव कैपिटल सरकार बनाएगी। चूंकि विशाखापट्टनम को एग्जीक्यूटिव राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा तो विशाखापट्टनम में ही सचिवालय होगा, जहां महत्वपूर्ण विभाग के कार्यालय भी होंगे। वहीं, करनूल में हाईकोर्ट और अमरावती में विधानसभा होगी। इन राजधानियों को स्थापित करने के लिए प्रतिष्ठित कंसल्टेंसी फर्मों की मदद ली जाएगी।

चंद्रबाबू नायडू को हराकर आंध्र की सत्ता में काबिज हुए जगन मोहन रेड्डी

चंद्रबाबू नायडू को हराकर आंध्र की सत्ता में काबिज हुए जगन मोहन रेड्डी

लोकसभा चुनाव 2019 के साथ हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस ने पूर्ववर्ती तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) सरकार को सत्ता से बेदखल करने में कामयाब हुई थी और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जगन मोहन रेड्डी प्रदेश में पांच उप-मुख्यमंत्री की नियुक्त करने की घोषणा करके सभी को हैरत में डाल दिया था और आंध्र प्रदेश मे तीन-तीन राजधानियों के फार्मूले ने इतिहास बदल कर रख दिया है।

प्रदेश में 5 डिप्टी सीएम की नियुक्त करने की घोषणा से सुर्खियों में आए

प्रदेश में 5 डिप्टी सीएम की नियुक्त करने की घोषणा से सुर्खियों में आए

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जगन मोहन रेड्डी प्रदेश में पांच उप-मुख्यमंत्री की नियुक्त करने की घोषणा करके सभी को हैरत में डाल दिया था और आंध्र प्रदेश मे तीन-तीन राजधानियों के फार्मूले ने इतिहास बदल कर रख दिया है। राज्य में में तीन राजधानी के फॉर्मूले को विधानसभा से मंजूरी मिल चुकी है और अब अमरावती की जगह विशाखापट्टनम का आधिकारिक ऑफिस होगा, जहां से मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी प्रदेश का कामकाज देखेंगे।

प्रदेशों में अभी तक बन चुके हैं दो राजधानी और दो डिप्टी सीएम

प्रदेशों में अभी तक बन चुके हैं दो राजधानी और दो डिप्टी सीएम

भारतीय इतिहास में आंध्र प्रदेश अब पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां तीन राजधानी और पांच उप मुख्यमंत्री हैं। इससे पहले देश में किसी प्रदेश में अधिकतम दो राजधानियां रही है। इनमें महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश हैं। हालांकि इस फेहरिस्त में पहले जम्मू-कश्मीर प्रदेश भी शामिल था, लेकिन अब चूंकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश में तब्दील हो चुके हैं तो जम्मू इस सूची से निकल गया है। महाराष्ट्र में मुंबई और नागपुर दो राजधानी हैं। मुंबई जहां शीतकालीन राजधानी नागपुर का बनाया गया है। वहीं, महाराष्ट्र की ग्रीष्मकालीन राजधानी मुंबई है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा ग्रीष्मकालीन और धर्मशाला शीतकालीन राजधानी हैं। वर्ष 2017 में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्मंत्री वीरभद्र सिंह की मंत्रिमंडल ने धर्मशाला को राज्य की दूसरी राजधानी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी थी।

ऐतिहासिक भूलों को सुधार रही है उनकी सरकारः जगन मोहन रेड्डी

ऐतिहासिक भूलों को सुधार रही है उनकी सरकारः जगन मोहन रेड्डी

जगन मोहन रेड्डी के शब्दों में प्रदेश में तीन राजधानी और पांच डिप्टी सीएम की नियुक्त के जरिए प्रदेश की मौजूदा सरकार ऐतिहासिक भूलों को सुधार रही हैं। उनके मुताबिक उनकी सरकार राजधानी को बदल नहीं रहे हैं, बल्कि प्रदेश में सिर्फ दो और नई राजधानी को जोड़ रहे हैं, अमरावती पहले जैसी ही रहेगी, क्योंकि प्रदेश सरकार किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो लोगों को सिर्फ ग्राफिक्स दिखा करके बेवकूफ नहीं बनाना चाहता हूं।

TDP ने 3 राजधानियों के फार्मूले को

TDP ने 3 राजधानियों के फार्मूले को "तुगलक अधिनियम" करार दिया

विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के प्रस्तावित तीन राजधानियों को "तुगलक अधिनियम" करार दिया है। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री कहां रहेंगे? क्या उसे अमरावती, विशाखापत्तनम और इदुपुलपाया (रेड्डी का गृह नगर) में तीन घर बनाने होंगे? नायडू ने कहा कि मौजूदा प्रदेश सरकार से बेहतर शासन तुगलक का था। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्ड को साइको करार देते हुए उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के फैसलों से निवेशक राज्य में आना बंद कर दिया था।

विरोध कर रहे टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू को हिरासत में लिया गया

विरोध कर रहे टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू को हिरासत में लिया गया

आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020 पर संबोधन को बाधा पहुंचा रहे विपक्षी तेलगू देशम पार्टी के 17 विधायकों को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया, जो सदन गतिरोध पैदा करते हुए सभापति के आसन के समीप पहुंच गए और अपने नेता एन चंद्रबाबू नायडू को बोलने की अनुमति देने की मांग कर रहे थे। इससे झल्लाए विधायी मामलों के मंत्री बुग्गाना राजेंद्रनाथ ने 17 टीडीपी विधायकों को निलंबित करने के लिए प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। निलंबित होने वालों में टीडीपी विधायकों में अत्चन्नायडू और एन चाइना राजप्पा शामिल हैं और जब तीन राजधानी के प्रस्ताव और 17 विधायकों के निलंबन के विरोध में विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू ने धरने पर बैठ गए तो उन्हें विधानसभा के बाहर हिरासत में लिया गया।

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