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तमिलनाडु में स्टरलाइट प्लांट पर हंगामा, पांच बड़े सवाल

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    तमिलनाडु के तूतीकोरिन ज़िले में वेदांता ग्रुप की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ चल रहा विरोध प्रदर्शन थमता नहीं दिख रहा है.

    यहां लोग महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि स्टरलाइट फ़ैक्ट्री से इलाक़े में प्रदूषण फैल रहा है. मंगलवार को ये प्रदर्शन हिंसक हो गया.

    मंगलवार को इस विरोध प्रदर्शन के सौ दिन पूरे हुए और तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों से आए प्रदर्शनकारियों ने ज़िलाधिकारी के दफ़्तर की ओर मार्च किया.

    पुलिस ने हालात पर काबू करने की कोशिश की लेकिन भीड़ बढ़ने लगी और पुलिस आंसू गैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया, बाद में गोलियां भी चलाई गईं.

    इस दौरान आम लोगों और पुलिस में झड़प हुई और पुलिस की गोलीबारी में नौ लोग मारे गए. मरने वालों में एक महिला भी थीं, घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

    बीबीसी ने इस घटना की पृष्ठभूमि, कारणों और तूतीकोरिन के हालत को समझने की कोशिश की है. इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब आगे दिए जा रहे हैं.



    तमिलनाडु
    ARUN SANKAR/AFP/Getty Images
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    स्टरलाइट क्या है?

    'वेदांता' दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनियों में से एक है. इसके मालिक बिहार के पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल हैं.

    स्कूलिंग पूरी करने के बाद अनिल अग्रवाल ने अपने पिता के साथ काम करना शुरू किया और फिर कुछ अरसे बाद वे पटना में मुंबई शिफ़्ट कर गए.

    मुबंई में उन्होंने 'वेदांता' नाम से एक कंपनी बनाई जिसे उन्होंने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड कराया. वेदांता समूह की ही एक कंपनी का नाम स्टरलाइट है.

    स्टरलाइट तमिलनाडु के तूतीकोरिन और सिलवासा (केंद्र शासित प्रदेश दादरा नागर हवेली की राजधानी) में ऑपरेट करती है.

    तूतीकोरिन वाले कारखाने में हर साल चार लाख टन तांबे का उत्पादन होता. साल 2017 में इस कंपनी का टर्नओवर 11.5 अरब डॉलर था.



    विरोध प्रदर्शन कब शुरू हुए?

    साल 1992 में महाराष्ट्र उद्योग विका सनिगम ने रत्नागिरि में स्टरलाइट लिमिटेड को 500 एकड़ ज़मीन का आबंटन किया.

    बाद में स्थानीय लोगों ने परियोजना का विरोध किया जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर जांच के लिए एक कमिटी बना दी.

    कमिटी ने 1993 में अपनी रिपोर्ट दी और इस रपट के आधार पर ज़िला अधिकारी ने कंपनी को उस इलाके में निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया.

    बाद में यही फ़ैक्ट्री महाराष्ट्र से तमिलनाडु शिफ़्ट कर गई.

    पर्यावरणविद नित्यानंद जयरामण बताते हैं, "साल 1994 में तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस फ़ैक्ट्री को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट जारी किया था."

    "बोर्ड ने कंपनी से पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके असर के बारे में जांच करने को कहा था. बोर्ड ये चाहता था कि फ़ैक्ट्री मन्नार की खाड़ी से 25 किलोमीटर दूरी पर लगाई जाए."

    "लेकिन इसके लिए स्टरलाइट कंपनी को पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की टेस्टिंग करने की ज़रूरत थी. अभी ये प्लांट मन्नार की खाड़ी से 14 किलोमीटर दूर स्थित है."

    कंपनी पर मुक़दमे

    नेशनल ट्रस्ट ऑफ़ क्लीन इन्वायरोमेंट, एमडीएमके नेता वाइको और कम्युनिस्ट पार्टियों ने फ़ैक्ट्री के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज करा रखे हैं.

    इन लोगों का कहना है कि स्टरलाइट की ये फ़ैक्ट्री उस इलाके को प्रदूषित कर रही है.

    कंपनी पर ये भी आरोप है कि 1997 से 2012 के बीच फ़ैक्ट्री ने सरकार के साथ अपने समझौते को आगे नहीं बढ़ाया.

    साल 2010 में हाई कोर्ट ने इस फ़ैक्ट्री को बंद करने का आदेश दे दिया. कंपनी ने हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की.

    सुप्रीम कोर्ट ने इस स्टरलाइट फ़ैक्ट्री पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और कंपनी को अपना ऑपरेशन जारी रखने की इजाजत दे दी.

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    REUTERS/P.Ravikumar
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    अभी अचानक विरोध क्यों?

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका विरोध अचानक नहीं शुरू हुआ है.

    पर्यावरणविद नित्यानंद जयरामण बताते हैं, "पहले दिन से ही हम हर तरह से उनका विरोध कर रहे हैं और ऐसा हम क़ानून को अपने हाथों में लिए बगैर कर रहे हैं."

    "ये विरोध स्टरलाइट लिमिटेड की विस्तार योजनाओं के ख़िलाफ़ है. हमारे विरोध को केवल एक कंपनी या स्टरलाइट फ़ैक्ट्री के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के तौर पर न देखा जाए."

    "हमारा विरोध एक रिहाइशी इलाके में स्थित एक कॉपर फ़ैक्ट्री को लेकर है."

    "हम उस सरकार के ख़िलाफ़ हैं, जो लोगों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव पर नज़र रखने में नाकाम रही है."

    नित्यानंद जयरामण सवाल करते हैं, "इस फ़ैक्ट्री ने पहले ही इस इलाके की हवा और ज़मीन से लेकर पानी तक को गंदा कर रखा है."

    "अदालतों ने भी ये बात मानी है. लेकिन इसके बावजूद एक सघन आबादी वाले इलाके में कंपनी अपने प्रोडक्शन यूनिट का विस्तार कैसे कर सकती है?"

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    ARUN SANKAR/AFP/Getty Images
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    कंपना का क्या कहना है?

    कंपनी के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी इसाकीमुथु एम ने स्टरलाइट का पक्ष रखते हुए कहा कि कंपनी के प्रोडक्शन यूनिट के विस्तार के लिए सरकार ने सभी ज़रूरी इजाजत दिए हैं.

    कंपनी का कहना है, हम कंपनी के बाई-प्रोडक्ट्स के असरदार इस्तेमाल के लिए सभी ज़रूरी कदम उठा रहे हैं. फ़ैक्ट्री के कचरे की भी पूरी तरह से जांच की जा रही है.

    कंपनी का कहना है कि नई यूनिट में साफ़ किया हुआ पानी ही इस्तेमाल होगा और यूनिट से निकलने वाले सारे तरल पदार्थों को रिसाइकिल किया जाएगा.

    प्रबंधन ने कहा कि वो किसी भी किस्म का गंदा पानी या अन्य दूषित पदार्थ फ़ैक्टरी के बाहर नहीं भेजते. उन्होनें ये भी कहा फ़ैक्टरी में 2000 लोगों को रोज़गार दिया गया है.

    साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से यूनिट 20,000 लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Five big questions on ruckus on Sterlite plant in Tamil Nadu

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