टीकाकरण में क्रांति ला सकती है पहली डीएनए कोविड वैक्सीन- डॉ. एनके अरोड़ा
डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि डीएनए आधारित वैक्सीन कोरोना के खिलाफ एक बड़ा हथियार साबित होगी।
नई दिल्ली, 1 सितंबर: नेशनल कोविड19 टास्क फोर्स कमेटी के वरिष्ठ सदस्य और एईएफआई कमेटी के सलाहकार डॉ. एनके अरोड़ा ने पहली डीएनए आधारित वैक्सीन जायडस कैडिला की जेडवाईसीओवीडी के प्रयोग की अनुमति दिए जाने और कैसे डीएनए वैक्सीन टीकाकरण में क्रांति ला सकती है आदि विषयों पर विस्तृत बात की। प्रस्तुत है डॉ. एनके अरोड़ा से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्न- जायडस कैडिला की जेडसीओवीडी डी कोविड वैक्सीन अन्य उपलब्ध कोविड वैक्सीन से किस तरह अलग है? विशेष रूप से फाइजर और मॉडर्ना की एमआरएनए वैक्सीन से इसे किस तरह अलग कहा जा सकता है?
उत्तर- जायडस कैडिला की जेडसीओवीडी दुनिया की पहली प्लाज्मिड डीएनए आधारित वैक्सीन है जिसे मानव प्रयोग में लाया जाएगा। डीएनए और डिऑक्सी रिबोन्यूक्लिक एसिड में एक जीवश्म के कई जेनेटिक कोड के कंपोनेट्स (अवयय)होते हैं। डीएनए आधारित वैक्सीन बनाने के लिए कोविड वायरस के उस प्रमुख हिस्से को जो कि सेल्स में प्रवेश करने में मदद करता है मरीज को संक्रमित करता है उसे कोडेड कर लिया जाता है। जब वैक्सीन मानव शरीर में पहुंचाया या लगाया जाता है, यह वायरस के उसी हिस्से का उत्पादन करती है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी या टी सेल्स एंटीबॉडी के लिए उत्तेजित करती हैं।
वैक्सीन में मौजूद डीएनए प्लाज्मिड झिल्ली से कवर होता है और शरीर में एंटीबॉडी बनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह अपने आप विघटित हो जाता है। यह डीएनए लैब में तैयार की गई संरचना है और इसमें मानव शरीर की आनुवांशिक संरचना में हस्तक्षेप करने की क्षमता होती है। एमआरएनए वैक्सीन को भी इसी सिद्धांत पर तैयार किया जाता है यह भी लैबोरटरी में तैयार की गई संचरना होती है न कि वायरस से ली गई सजीव संचरना।
प्रश्न- क्या इस वैक्सीन को बच्चों के लिए भी प्रयोग की अनुमति दे दी गई है?
उत्तर- किसी भी नई वैक्सीन का परीक्षण सबसे पहले व्यस्क लोगों में होता है इसके बाद इसे बच्चों पर प्रयोग किया जाता है और इसे वर्तमान में सभी अन्य बाल टीकों की तरह ही सुरक्षित पाया गया है। इसी तरह कोविड के लिए वर्तमान में प्रयोग की जाने वाली सभी वैक्सीन जैसे कोविशील्ड, कोवैक्सिन या फिर स्पूतनिक वी जिन्हें व्यस्क के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, इसमें कोवैक्सिन का अब 2-18 साल के बच्चों के लिए परीक्षण किया जा रहा है। वैक्सीन के प्रयोग के संदर्भ में ध्यान देने वाली बात इसकी सुरक्षा और बच्चों में इम्यूनोजेनेटी क्षमता को जांचना है। अब हमारे पास किशोरावस्था के बच्चों के लिए भी देश की पहली स्वीकृत सुरक्षित और प्रभावी कोविड वैक्सीन उपलब्ध है।
प्रश्न- क्या यह वैक्सीन अन्य स्वीकृत वेक्सीन से भी अधिक सुरक्षित है?
उत्तर- जायडस कैडिला की जेडवाईसीओवी डी के अब तक किए गए पहले, दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षणों में इसे हर आयु समूह के लिए सुरक्षित पाया गया है। यही नही इससे वैक्सीन के बाद होने वाले मामूली साइड इफेक्ट्स (प्रतिक्रियाजन्यता) जैसे बुखार, दर्द, सूजन आदि भी वर्तमान में प्रयोग की जाने वाली वैक्सीन के एवज में कम देखने को मिले हैं।
प्रश्न- व्यस्क टीकाकरण की तरह ही इस समूह के टीकाकरण में भी क्या प्राथमिक एज या आयु समूह को रखा जाएगा?
उत्तर- व्यस्क टीकाकरण में प्राथमिक समूहों को व्यवसाय, कोमोरबीडिज या एक साथ कई बीमारियां और उम्र के आधार पर रखा गया था। इस समूह में संक्रमण के जोखिम के खतरे और गंभीर बीमारी वाले लोगों को प्राथमिकता के आधार पर मृत्यु दर कम करने के लिए पहले टीका दिया गया। लेकिन बच्चों में कोविड संक्रमण के लक्षण बेहद हल्के ए सिम्पमेटिक या मामूली होते हैं, जबकि कोविड संक्रमित बच्चों की मृत्यु के मामले भी बड़ों के एवज में कम देखे गए। बड़ों की तरह ही बच्चों मे भी टीकाकरण की प्राथमिकता तय की जाएगी, इसमें पहले समूह में उन बच्चों को कोविड का वेक्सीन दिया जाएगा, जिन्हें पहले से कई गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटिज, दिल की बीमारी, सीकेडी या किडनी की बीमारी, लिवर, या फिर सांस की तकलीफ है, ऐसी किसी भी अवस्था में सामान्य बच्चों की अपेक्षा कोविड संक्रमण का गंभीर असर हो सकता है।
दूसरा, भारत में कुल 44 करोड़ बच्चे हैं जिसमें 12 करोड़ बच्चे 12-17 साल की आयु वर्ग के बीच के हैं। व्यस्क टीकाकरण में तय की गई प्राथमिकता के अनुसार ही बच्चों का भी टीकाकरण किया जाएगा। जिसमें कोमोरबीडिज बच्चों को पहले टीका मिलेगा।
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प्रश्न- इस आयु वर्ग को कोविड का वैक्सीन कब से मिलना शुरू हो जाएगा? वर्तमान में देश में कोविड वैक्सीन उत्पादन क्षमता कितनी है?
उत्तर- व्यस्क टीकाकरण के साथ ही किशोरावस्था के टीकाकरण (कोमोरबीडिज समूज )के हम अक्टूबर मध्य से वैक्सीन देना शुरू किया जा सकता है। जबकि सामान्य बच्चों या किशोरो के लिए टीकाकरण वर्ष 2022 के पहले मध्यान्ह में ही शुरू किया जा सकेगा। वर्तमान में जायडस कैडिला यानि जेडवाईसीओवीटू की उत्पादन क्षमता एक करोड़ डोज प्रति माह है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में उत्पादन क्षमता दो से तीन करोड़ प्रतिमाह हो सकती है। हमें यह समझने की जरूरत है कि डीएनए वैक्सीन को बनाने की प्रक्रिया धीमी होती है और इसकी तकनीक को अन्य कंपनियों हस्तांतरित करने में भी समय लगता है।
प्रश्न- डीएनए आधारित वैक्सीन की दो डोज के बीच कितना अंतराल होगा?
उत्तर- यह तीन डोज की वैक्सीन होगी, जिसे बिना सूई के एक तरह के उपकरण जिसे जेट या फार्माजेट कहा जाता है के द्वारा दिया जाएगा, इस तरह यह पूरी तरह दर्द रहित और नीडल रहित टीका होगा। प्रत्येक डोज में दो एमजी वैक्सीन होगी, जिसे पुन: दो भागों में विभाजित किया जाएगा और दो बार अलग अलग साइट्स पर लगाया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक इम्यून रेस्पांस प्राप्त किया जा सके। सभी तीनों डोज को चार हफ्ते अंतराल में लगाया जाएगा। वैक्सीन लगने के बाद किसी तरह के दुष्प्रभाव न के बराबर है यही नहीं वैक्सीन लगने वाली साइट या जहां वैक्सीन लगेगी वहां दर्द या असहजता भी महसूस नहीं होगी। यही नहीं जायडस कैडिला के बाद बुखार या थकान भी नहीं होगी, वर्तमान में यह वैक्सीन केवल भारत में ही उपलब्ध है। यह पूरी तरह भारत में निर्मित वैक्सीन होगी, और हम ऐसी उम्मीद करते हैं कि यह वैक्सीन टीकाकरण में केवल भारत में ही नहीं विश्वभर में क्रांति ला देगी। हम अब किसी भी जिद्दी वायरस के खिलाफ अधिक मजबूत एंटीबॉडी विकसित करने में सक्षम होंगे। इसी आधार पर एचआईवी की वैक्सीन भी तैयार की जा सकती है।
प्रश्न- अब जबकि बच्चों के लिए भी कोविड की वैक्सीन आ गई है आपको क्या लगता है कि टीकाकरण केबाद ही बच्चों को स्कूल भेजना सही होगा?
उत्तर- जैसा कि हमने पहले ही कहा है कि बच्चों के टीकाकरण के लिए इंतजार किया जा सकता है। भारत और वैश्विक आंकड़ों के आधार पर यह देखा गया कि बच्चों में कोविड के गंभीर संक्रमण और मृत्यु की संभावना बड़ों की अपेक्षा कम है। हालांकि बच्चों द्वारा संक्रमण फैल सकता है, 18 साल से कम उम्र के बच्चों की अपेक्षा बड़ों में कोविड संक्रमण से मृत्यु और कोविड की गंभीर स्थिति का खतरा 15 गुना अधिक होता है। इसलिए बच्चों के आसपास रहने वाले व्यस्क स्कूल हो या घर पर यदि सभी को कोविड का वैक्सीन लगा होगा तो हम बच्चों के लिए कोविड संक्रमण सुरक्षा का घेरा तैयार कर सकेगें। इस स्थिति वायरस के फैलाव और संचरण की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है या रोका जा सकता है। मुझे यह लगता है कि अभिभावकों को बच्चों को स्कूल जरूर भेजना चाहिए और इसके लिए कोविड टीकाकरण का इंतजार करना सही नहीं है, इसकी दो प्रमुख वजह हैं पहला बच्चों में कोविड संक्रमण का गंभीर खतरा होने की संभावना कम होती है या न के बराबर है दूसरा बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उनका स्कूल जाना बहुत जरूरी है।
प्रश्न- कुछ अभिभावक तीसरी लहर की शंका के चलते बच्चों को अभी स्कूल भेजने के लिए सहमत नहीं हैं, क्या वास्तव में तीसरी लहर आना निश्चित है?
उत्तर- व्यक्तिगत रूप से मुझे ऐसा लगता है वायरस की वर्तमान स्थिति, एपिडेमियोलॉजी, सीरो पॉजिटिविटी दर और सबसे अहम अभी देखे जा रहे 90 प्रतिशत कोविड मरीज डेल्टा वेरिएंट के हैं अभी कोई नया वेरिएंट पिछले चार हफ्तों मे नहीं देखा गया है, ऐसा कहा जा सकता है कि हम दूसरी लहर की अंतिम अवस्था में है। तीसरी लहर की आशंका उस स्थिति में ही मजबूत होगी जबकि हम कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करना छोड़ देगें, विशेष रूप से आने वाले त्यौहार के मौसम में भी हमें कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करना होगा, उत्सव मानने के लिए लोगों का एक जगह पर इकट्टा होना हानिकारक हो सकता है। कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन स्कूलों में भी करना जरूरी है। क्लास में भीड़ जमा नहीं होने देनी है स्कूल अध्यापिकाओं और बच्चों के लिए मास्क अनिवार्य रूप से प्रयोग किया जाए मास्क का प्रयोग करने के लिए स्कूल स्टॉफ को बच्चों को प्रोत्साहित करना होगा। बच्चे डेढ साल से भी अधिक लंबे समय से घरों में कैद हैं, उन्होंने कोविड काल में अपने जीवन में कई तरह की घटनाएं देखी हैं। किसी भी तरह का अहम निर्णय लेने से पहले अभिभावक भी मानसिक रोग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् या फिर मनोचिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।












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