किसान आंदोलन: दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन के बारे में क्या कहते हैं मुख्यमंत्री खट्टर के गांववाले

किसान आंदोलन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का गांव बनियानी
Sat Singh Dhankhar/BBC
किसान आंदोलन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का गांव बनियानी

दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के शोर-शराबे से क़रीब अस्सी किलोमीटर दूर है हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का बनयानी गांव.

खट्टर लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने हैं लेकिन उनके गांव का नज़ारा हरियाण के किसी दूसरे गांव की तरह ही दिखता है.

रोहतक ज़िला मुख्यालय से भिवानी रोड पर आठ किलोमीटर दूर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के गांव बनियानी का पहला साइन बोर्ड दिखाई देता है.

शुरुआत में एक छोटी सी एप्रोच रोड पर गांव की तरफ़ जाते हुए एक किलोमीटर तक दोनों तरफ़ खेत दिखाई देते हैं.

जर्जर हालात में गांव का बस स्टैंड है, जिसमें ठीक से खड़े होने तक की जगह नहीं है.

किसान आंदोलन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का गांव बनियानी
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मुख्यमंत्री का पैतृक घर

क़रीब छह हज़ार की आबादी वाले गांव के एक शख़्स ने बताया कि हालांकि ये मुख्यमंत्री का गांव है लेकिन पीने के पानी की बड़ी समस्या है.

उन्होंने कहा, "ना जानवरों के लिए ना गांववालों के लिए पानी का पूरा प्रबंध है. मुख्यमंत्री का गांव होने का हमें कोई ख़ास लाभ नहीं मिला. पिछले छह साल से, मनोहर लाल भी सरकारी प्रोग्राम में ही कभी-कभी आते हैं और तुरंत निकल जाते है. उन तक गांव की समस्या पहुँच ही नहीं पा रही है."

मुख्यमंत्री का पैतृक घर जो गांव के बीच में है, उस पर ताला लटकता रहता है. घर पर मनोहर लाल का फोटो लगा हुआ है.

गांववालों का कहना था कि मुख्यमंत्री के भाई भी गांव में खेती करते हैं और दुकान चलाते हैं हालांकि उनसे हमारी मुलाक़ात नहीं हो सकी.

दिलचस्प बात ये भी देखने को मिली कि भारतीय जनता पार्टी का झंडा या मनोहर लाल का फोटो सिर्फ़ कुछ ही जगह पर देखने को मिला.

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हरियाणा सरकार से नाराज़गी

लेकिन गांव में खेती करने वाले लोग किसानों के प्रदर्शन के साथ नज़र आए. किसान या तो बैलगाड़ी से या ट्रैक्टर पर अपने खेत की तरफ़ जा रहे हैं.

हाथ में दराती लिए महिलाएं अपने परिवार के पुरुषों के साथ खेत में काम करती दिखाई दे रही हैं.

दूर से ऐसा लग रहा था कि दिल्ली-बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन से वे लोग अनजान हैं.

गांव के धर्मवीर अपने घर के बाहर बैल को हरा चारा खिला रहे थे. उन्होंने बताया कि उनकी तीन एकड़ की खेती है और वे हरियाणा सरकार से ख़ासे नाराज़ हैं.

उनका दावा है कि मंडियों में फ़सलों का दाम नहीं मिलता और बीज और खाद के दाम मार्केट में इतने बढ़ चुके हैं कि उनके जैसे कम ज़मीन वाले किसान के लिए खेती में सिर्फ़ घाटा ही घाटा है.

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हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर

उन्होंने बताया, "मैं रोज़ सुबह अख़बार पढ़ता हूँ और पंजाब से आए किसानों के मुद्दे को सही समझता हूँ. आज किसान अगर अपना काम-धाम छोड़कर दिल्ली के बॉर्डर पर बैठा है तो समझ लीजिए वो अपनी बात मनवाकर ही वापस लौटेगा."

अपने दस साल के बेटे के साथ बैल बुग्गी पर खेत के रास्ते में मिले राजकुमार ने बताया कि उनके गांव से कई किसान हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसान आंदोलन में गए हुए हैं.

आंदोलन को सही बताते हुए राजकुमार ने बताया कि किसान को कभी मौसम की मार, कभी फसल में बीमारी की मार, कभी उचित मूल्य न मिल पाने के कारण, नुक़सान होता ही रहता है.

उन्होंने बताया, "इस साल मैंने गेहूं की फ़सल का भंडारण किया था कि जब महंगी हो जाएगी तो बेच कर कुछ मुनाफ़ा कमा लूंगा पर ऐसा नहीं हो पाया और सीज़न में मिलने वाले मूल्य से भी कम में बेचना पड़ा. मैंने अपने बच्चे कि स्कूल की फ़ीस तक नहीं भरी है क्योंकि घर में इतने पैसे ही नहीं है. ये मेरा ही नहीं हर किसान का यही हाल है इसलिए वो आज आंदोलन कर रहे हैं."

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पंजाब से आए किसान

इस तरह की भावना व्यक्त करते हुए, गन्ने के खेत में काम कर रहे कंवल सिंह ने अपने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के उस बयान पर अफ़सोस जताया जिसमें खट्टर ने दावा किया था कि हरियाणा का किसान आंदोलन में शामिल नहीं है.

कंवल सिंह ने बताया, "हमारी असली पहचान किसान की है जो अपनी मेहनत से धरती का सीना चीर कर अनाज उगाता है और जिससे सारे देश का पेट भरता है. हम चट्टान की तरह पंजाब से आए किसानों के साथ हैं और जब तक वो मोर्चे पर डटे हुए है, हम उनके साथ हैं."

कंवल सिंह ने बताया कि शांति से दिल्ली जा रहे पंजाब के किसानों पर हरियाणा पुलिस की ओर से आंसू गैस और ठंडे पानी की बौछार करने की चर्चा पूरे गांव में हुई और गांव वालों को इससे काफ़ी दुख पहुंचा है.

खेत की ज़मीन को ट्रैक्टर और कल्टीवेटर से संवारते हुए दिनेश कुमार ने बताया कि जिस ज़मीन पर वो खेती करता हैं, वो मुख्यमंत्री खट्टर के परिवार से ही संबंधित हैं और एक किसान होने के नाते वो महसूस करते हैं कि ये तीनों कृषि क़ानून किसान के पक्ष में नहीं हैं.

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पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की तरह देश के बाक़ी किसान आंदोलन क्यों नहीं कर रहे हैं?

किसान आंदोलन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का गांव बनियानी
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मुख्यमंत्री खट्टर का बयान

दिनेश ने बताया, "हमारे साथ ही मुख्यमंत्री के चाचा का लड़का भी किसानी करता है और हम सबकी भावना आंदोलन कर रहे पंजाब के किसानों के साथ हैं और उन्हें हरियाणा के किसानों का पूरा समर्थन हैं."

दिनेश कहते हैं कि किसान चाहे पंजाब का हो, उत्तर प्रदेश का हो, राजस्थान का हो. किसान तो किसान हैं और सरकार कोई भी हो- वो अपने भाईचारे के साथ हैं.

ये पूछने पर कि मुख्यमंत्री खट्टर का बयान था कि हरियाणा का किसान साथ नहीं हैं, उन्होंने कहा, "हरियाणा का किसान तन, मन और धन से साथ हैं. और हम किसान के साथ हैं और राजनीतिक लोगों के साथ नहीं हैं."

मनोहर लाल खट्टर के गांव के किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार को जितना जल्दी हो सके समाधान की तरफ पहल करनी चाहिए क्योंकि जो किसान आंदोलन में है उनके साथ महिलाएं और बच्चे भी हैं और ठंड के मौसम में खुले आसमान के नीचे अन्नदाता को और परेशान न होने दे.

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