केंद्र ने झुकने से किया इनकार, कहा- जब तक किसान संगठन नहीं देते विकल्प, तब तक बातचीत मुश्किल
नई दिल्ली, 23 मई: किसान आंदोलन को 6 महीने का वक्त पूरा होने वाला है, लेकिन अभी तक इस मसले का कोई हल निकलता नहीं दिखा। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती, तब तक वो दिल्ली से लगती सीमाओं पर डटे रहेंगे। वहीं दूसरी ओर केंद्र भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है। साथ ही ये साफ कर दिया है कि जब तक किसान संगठन तीनों कानूनों को 18 महीने के लिए स्थगित करने के प्रपोजल को मान नहीं लेते, तब तक आगे की बातचीत संभव नहीं है।
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मामले में शनिवार को केंद्र का पक्ष रखते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान संगठनों को या तो कानून के प्रति पॉजिटिव होना चाहिए या फिर वो हमें कानूनों को निरस्त करने का विकल्प प्रदान करें, लेकिन उन्होंने अभी तक कोई विकल्प नहीं दिया है। अगर आने वाले दिनों में वो कोई विकल्प सरकार को देते हैं, तो इस पर बात आगे की जाएगी। तोमर का ये बयान ऐसे वक्त में आया, जब एक दिन पहले पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बातचीत शुरू करवाने की मांग की थी।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें 25 मई तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सरकार की ओर से नहीं मिली, तो फिर वो 26 मई से अपना आंदोलन और ज्यादा तेज कर देंगे। फिलहाल अभी उन्होंने 26 मई को आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर ब्लैक डे मनाने का फैसला लिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि जैसा पहले के 11 दौर की वार्ता में हुआ, वैसे अभी भी बातचीत का मतलब नहीं होगा, क्योंकि हर बैठक में किसान नेता कानून को खत्म करने की मांग पर अड़े रहते हैं। अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, तो फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा। मामले में एक अधिकारी ने कहा कि यूनियनों के पास एक संतोषजनक समाधान पर बातचीत करने का मौका है। अदालत का फैसला संतोषजनक हो भी सकता है और नहीं भी।












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