कांग्रेस आज देशभर में मनाएगी 'किसान विजय दिवस', आंदोलन में मारे गए 700 किसानों के परिवार से मिलेंगे नेता
कांग्रेस आज देशभर में मनाएगी 'किसान विजय दिवस', आंदोलन में मारे गए 700 किसानों के परिवार से मिलेंगे नेता
नई दिल्ली, 20 नवंबर: कांग्रेस पार्टी आज शनिवार को तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने के जश्न के लिए देश भर में रैलियों का आयोजन करेगी। कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की थी कि वह शनिवार को 'किसान विजय दिवस' मनाएगी और विजय रैलियों का आयोजन करेगी। कांग्रेस नेता किसान आंदोलन के दौरान मारे गए 700 से अधिक किसानों के परिवारों से मिलेंगे और उनके लिए प्रार्थना करने के लिए कैंडल मार्च और रैलियां करेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने सभी राज्य इकाइयों से राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर इस तरह की रैलियां और कैंडल मार्च आयोजित करने को कहा है।
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के सी वेणुगोपाल ने पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुखों को लिखे पत्र में कहा, "आइए हम इसे किसानों की ऐतिहासिक जीत के रूप में मनाने के लिए देश में शामिल होने के लिए व्यापक कार्यक्रम आयोजित करें। हमारे क्षेत्रों में शहीद किसानों के परिवारों से जाकर किसानों के संघर्ष की जीत को चिह्नित करें।"
पीएम मोदी ने कृषि कानून निरस्त करने का किया ऐलान
कृषि कानून निरस्त करने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 नवंबर) को राष्ट्र के नाम संबोधन में की। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में किसान आंदोलन में प्रदर्शन कर रहे किसानों से माफी मांगी और कहा कि सरकार उन्हें कानूनों के लाभों के बारे में समझाने में विफल रही है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि यह फैसला सरकार के कल्याण के लिए नहीं बल्कि आगामी चुनावों के कारण लिया गया है।
जानिए किसान आंदोलन के बारे में
बता दें कि संसद ने पिछले साल सितंबर 2020 में कृषि कानून पारित किया था। जबकि केंद्र ने कहा कि वे किसानों के लिए फायदेमंद हैं। इस कानून के आने के बाद किसानों द्वारा तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। विरोध कर रहे किसानों का दावा था कि कानूनों से बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा होता है।
शुरुआत में यह विरोध पंजाब और हरियाणा तक सीमित था, बाद में यह विरोध देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। पिछले साल नवंबर में किसानों ने 'चलो दिल्ली' का आह्वान किया और दिल्ली की सीमाओं पर एकत्र हुए। तब से वे वहां डेरा डाले हुए हैं और कई दौर की बातचीत गतिरोध का कोई समाधान खोजने में सरकार विफल रही थी।












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