'LAC पर बलों की तैनाती असामान्य, सुरक्षा की अनदेखी नहीं', चीन के साथ सीमा विवाद पर जयशंकर
S Jaishankar on India-China Dispute: चीन के साथ भारत का वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) एलएसी सीमा गतिरोध काफी लंबे समय से जारी है। इस बीच देश में चल रहे लोकसभा चुनाव के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ एलएसी पर बलों की तैनाती असामान्य है।
जयशंकर ने मंगलवार को चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बलों की तैनाती को 'असामान्य' बताया और कहा कि देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

दरअसल, विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने चीन के साथ सीमा मतभेदों पर बात की।
'हम सीमा पर शांति बनाए रखेंगे'
आईसीसी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि 1962 के बाद राजीव गांधी 1988 में चीन गए, जो कई मायनों में (चीन के साथ) संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। यह स्पष्ट समझ थी कि हम अपने सीमा मतभेदों पर चर्चा करेंगे, लेकिन हम सीमा पर शांति बनाए रखेंगे। और बाकी रिश्ता जारी रहेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि तब से यह चीन के साथ संबंधों का आधार रहा है। अब जो बदला है वह 2020 में हुआ। 2020 में चीनी कई समझौतों का उल्लंघन करते हुए हमारी सीमा पर बड़ी संख्या में सेना लाए। भारत ने बलों की जवाबी तैनाती के जरिए जवाब दिया और अब चार साल से सेनाएं गलवान में सामान्य बेस पोजिशन से आगे तैनात की जा रही हैं।
'देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं करनी चाहिए'
उन्होंने कहा, "एलएसी पर यह बहुत ही असामान्य तैनाती है। दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए भारतीय नागरिक के रूप में, हममें से किसी को भी देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यह आज एक चुनौती है।"
उन्होंने कहा, एक आर्थिक चुनौती भी है, जो "पिछले वर्षों में विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की उपेक्षा के कारण है। बता दें कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं।
पिछले हफ्ते जयशंकर ने कहा था कि नई दिल्ली को बीजिंग के साथ बाकी मुद्दों के समाधान की उम्मीद है. मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की वापसी सीमा पर शांति पर निर्भर करती है।












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