Holi 2023 में कैसे लगेगी रंगों के Infection पर लगाम? जानिए एक्सपर्ट्स की राय
होली में अक्सर हम रंगों की क्वालिटी का ध्यान रखते। जिसका गंभीर असर त्वचा के साथ हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। ऐसे में कुछ खास सावधानियों के साथ हम होली को दुगने उत्साह से मना सकते हैं।

भारत में होली का त्योहार रंगों, उत्साह, प्रेम और सद्भावना का प्रतीक है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है। खासकर ये रंगों का उत्सव है, जिसमें लोग तरह- तरह के कलर्स का खूब इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कुछ रंग ऐसे भी हैं, वायरस संक्रमण को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में हमें होली खेलते वक्त विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि होली के इस सीजन में रंगों की वजह से कौन से ऐसे वायरस हैं जिनका प्रकोप अधिक होता है और इनसे बचने के लिए एक्सपर्ट्स ने क्या राय दी है।
होली (Holi 2023) के दौरान बदलते मौसम में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रंग (Synthetic colors in Holi) संक्रमण को दे सकते हैं। एक्पर्ट्स का मानना है कि मार्च के मध्य से15 अप्रैल के आसपास वायरस संक्रमण पीक पर होता है। ऐसे में त्वचा संक्रमण, मौसमी फ्लू, मोनोन्यूक्लिओसिस, सर्दी और खांसी जैसे संचारी रोग फैलते हैं।
सिंथेटिक रंग से इन्फ्लुएंजा को बढ़ावा
डर्मेटोलॉजिस्ट्स् का मानना है कि बदलते मौसम और होली के दौरान सिंथेटिक रंगों का उपयोग वायरल संक्रमण को बढ़ा सकता है। होलो की भव्य तरीके से मनाने के लिए रंगों के प्रयोग का विशेष ध्यान रखना होता है। मार्च और अप्रैल ऐसा महीना है जिसमें वायरल त्वचा संक्रमण, मौसमी फ्लू, मोनोन्यूक्लिओसिस, सर्दी और खांसी जैसे संचारी रोग चरम पर होते हैं। इस दौरान खांसी और बुखार के बढ़ते मामलों को इन्फ्लुएंजा का संक्रमण काफी तेज देखा जा रहा है।
ये लोग रखें खास सावधानी
बदलते मौसम में वायरल और फंगल त्वचा संक्रमण बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि होली सेलिब्रेशन के बाद संक्रमण की चपेट में आने की संभावना भी बढ़ जाती है। होली के उत्सव में सीधे त्वचा का संपर्क शामिल होता है और लोग एक दूसरे के चेहरे पर रंग लगाते हैं। होली के दौरान हवा में पार्टिकुलेट मैटर का प्रभाव बढ़ जाता है, जो यह त्वचा और सांस की जलन पैदा कर सकता है। जिन लोगों को पहले से ही एटोपिक डर्मेटाइटिस, ब्रोन्कियल अस्थमा और स्किन एग्जिमा है, उन्हें सिंथेटिक रंगों से पूरी तरह बचना चाहिए।
जानिए एक्सपर्ट्स की राय
होली के रंगों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों में सिंथेटिक रंग होते हैं। ऐसे रंगे के इस्तेमाल से स्किल एलर्जी बढ़ सकता है। ऐसे में होली खेलने से पहले एसपीएफ (सन प्रोटेक्शन फैक्टर) के साथ सनब्लॉक या एक अच्छी बैरियर क्रीम लगाई जा सकती है। त्वचा पर रंग लगने के बाद उसे तुरंत धो लेना चाहिए। एक्सपर्ट्स ज्यादातर गैर-सिंथेटिक या हर्बल रंगों का उपयोग की सलाह देते हैं।
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