Exclusive Interview: देश के इकलौते कलेक्टर जो बने ओलंपियन, IAS सुहास एलवाई के संघर्ष व कामयाबी की पूरी कहानी
देश के इकलौते कलेक्टर जो बने ओलंपियन, IAS सुहास एलवाई के संघर्ष व कामयाबी की पूरी कहानी
नई दिल्ली। कहते हैं कि अगर आपने मन में हौंसला हो तो आप बड़ी से बड़ी मुश्किलों को पार कर अपनी मंजिल को पा सकते हैं। अगर आपके मन में दृढ़ निश्चिता हो तो आपके मार्ग में कोई बाधक नहीं बन सकता है। आप अपने हौंसले और हिम्मत के दम पर आपनी किसी भी कमजोरी से पार पा सकते हैं। आज हम ऐसे ही एक बुलंद इरादे वाले आईएएस अधिकारी से मिलने जा रहे हैं, जिसने नाम के साथ कई बड़े रिकॉर्ड जुड़े हैं। जिला गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी सुहास लालिनाकेरे यथिराज अपने मजबूत इरादों और दृढ़ निश्चिता के लिए जाने-जाते हैं। सुहास एलवाई टोक्यो पैरालिंपिक में पैरा बैंडमिंटन में भारत का प्रतिनिधत्व करेंगे। IAS अधिकारी सुहास एलआई टोक्यो पैरालिंपिक में गोल्ड लाने के लिए जी-जान से मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने वनइंडिया के साथ एक्सक्यूसिव बातचीत की और अपना सक्सेस मंत्र हमसे साझा किया।

सुहास ने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने के बाद 2007 में UPSC की, जिसके बाद उन्होंने IAS की पोस्टिंग ली और फिर अपने खेल पर फोकस किया। जो खेल वो पहले शौक के तौर पर खेलते थे, धीरे-धीरे वो उनकी सफलता का रास्ता बन गया। बैंडिमिंटन में मेडल जीतने के बाद उनका उत्साह बढ़ा और फिर एक नए सफर की शुरुआत हो गई। उन्होंने अपने खेल की शुरुआत खेतों से की। पिताजी ने उनका भरपूर साध दिया, उनके परिवार ने उनकी विकलांगता को कभी उनके सफर में बाधा के तौर पर नहीं आने दिया। सुहास अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकृति ने सबको सबकुछ नहीं दिया। हमारे पास जो नहीं है उसे सोचकर पछताने से अच्छा है उसे भूलकर आगे बढ़ना। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को लेकर समाज को सोच बदलने की जरूरत है। लोगों को अपन माइंडसेट बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता को सिर्फ परिवार और माता-पिता और शिक्षकों के मनोबल के दूर किया जा सकता है। अगर आप मन से मजबूत है तो दिव्यांगता रास्ते में आड़े नहीं आती।
उन्होंने कहा कि जिस चीज को दिल से चाहते हैं उसे पूरी कायनात आप तक पहुंचाने की कोशिश करती है। सुहास ने कहा कि आज युवा इस डर से आगे नहीं बढ़ रहे हैं कि उन्हें पहले ही हार का डर सताने लगता है, लेकिन जब हारने का डर खत्म हो जाता तो हम खुद ब खुद जीत की ओर बढ़न लगेंगे। उन्होंने युवाओं से अपील की कि सफर में सिर्फ मंजिल ही सबकुछ नहीं होता, कभी कभी सफर को भी इंज्वाइन करना चाहिए। सुहास एलवाई ने कहा कि खेल के प्रति प्रोत्साहन की जरूरत है। खेल में सक्सेस रेट को लेकर सुहास ने कहा कि अब इस सेक्टर में भी काफी बदलाव हुआ है। खेल में खिलाड़ी के साथ-साथ स्पोर्ट्स मेनेंटमेंट जैसी चीजें आ गई है।
IAS अधिकारी सुहास एलवाई के साथ पूरी बातचीत को देखने के लिए यहां क्लिक कीजिए












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