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ELECTORAL BONDS: इलेक्टोरल बॉन्ड के बाद भी BJP मालामाल, 3811 करोड़ के चंदे में किस कंपनी ने कितना किया डोनेट?

ELECTORAL BONDS BJP: सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद यह माना जा रहा था कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर असर पड़ेगा। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद के पहले पूरे वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चंदे के मामले में ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी।

बॉन्ड नहीं रहे, फिर भी BJP को रिकॉर्ड चंदा

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में BJP को कुल ₹6,088 करोड़ का चंदा मिला। यह रकम पिछले साल 2023-24 में मिले ₹3,967 करोड़ की तुलना में करीब 53 प्रतिशत ज्यादा है। यानी चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बावजूद BJP की फंडिंग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। यह आंकड़े BJP की ओर से 8 दिसंबर 2025 को चुनाव आयोग को सौंपी गई 162 पन्नों की योगदान रिपोर्ट से सामने आए हैं।

ELECTORAL BONDS BJP

🟡 चुनावी ट्रस्टों से आया सबसे बड़ा हिस्सा

रिपोर्ट के मुताबिक BJP को मिले कुल चंदे में से ₹3,744 करोड़ केवल चुनावी ट्रस्टों के जरिए आए। यह कुल फंड का करीब 61 प्रतिशत है। बाकी ₹2,344 करोड़ की रकम व्यक्तिगत दानदाताओं और कॉरपोरेट कंपनियों से मिली। यानी बॉन्ड की जगह अब ट्रस्ट और सीधे बैंकिंग चैनल फंडिंग का मुख्य जरिया बन गए हैं।

🟡 3811 करोड़ का चंदा, 82 प्रतिशत अकेले BJP के नाम

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि 2024-25 में नौ चुनावी ट्रस्टों ने कुल ₹3,811 करोड़ का चंदा राजनीतिक दलों को दिया। इसमें से ₹3,112 करोड़ यानी करीब 82 प्रतिशत रकम अकेले BJP को मिली। इसके मुकाबले कांग्रेस को सिर्फ ₹299 करोड़ मिले, जो कुल चंदे का लगभग 8 प्रतिशत है। बाकी सभी दलों को मिलाकर केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही नसीब हुआ।

🟡 BJP बनाम कांग्रेस, फासला और बढ़ा

2024-25 में BJP का कुल फंड ₹6,088 करोड़ रहा, जबकि कांग्रेस का कॉर्पस सिर्फ ₹522.13 करोड़ तक सीमित रहा। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो BJP के पास कांग्रेस से लगभग 12 गुना ज्यादा पैसा है। इतना ही नहीं, कांग्रेस समेत एक दर्जन विपक्षी दलों को मिलाकर जो ₹1,343 करोड़ मिले, उससे करीब साढ़े चार गुना ज्यादा रकम अकेले BJP के खाते में गई।

🟡 कौन-कौन सी कंपनियों ने किया कितना दान?

BJP के टॉप डोनर्स की सूची भी काफी दिलचस्प है। इसमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹100 करोड़, रुंगटा संस ने ₹95 करोड़ और वेदांता लिमिटेड ने ₹67 करोड़ का चंदा दिया। इसके अलावा मैक्रोटेक डेवलपर्स, ITC, टाटा समूह से जुड़ी कंपनियां, हीरो एंटरप्राइजेज, मैनकाइंड फार्मा और हिंदुस्तान जिंक जैसे नाम भी शामिल हैं। यह दिखाता है कि कॉरपोरेट फंडिंग अब खुलकर सामने आ रही है।

पूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट 2024-25 में सबसे बड़ा दानदाता बनकर उभरा। इस ट्रस्ट ने कुल ₹2,668 करोड़ का चंदा दिया, जिसमें से ₹2,180 करोड़ से ज्यादा BJP को मिले। वहीं प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने करीब ₹917 करोड़ का योगदान दिया, जिसमें से 80 प्रतिशत से अधिक रकम BJP के खाते में गई। इन ट्रस्टों को जिंदल, टाटा, भारती एयरटेल और मेघा इंजीनियरिंग जैसी बड़ी कंपनियों से फंड मिला।

BJP को अलग-अलग वित्तीय वर्षों में कितना चंदा मिला?

चुनावी चंदे के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलने वाला चंदा लगातार बढ़ता रहा है। अलग-अलग वित्तीय वर्षों में पार्टी के खाते में आई रकम और उसका प्रतिशत कुछ इस तरह रहा है।

🔹2019-20: रिकॉर्ड चंदा, 3,427 करोड़ रुपये: वित्तीय वर्ष 2019-20 में BJP को 3,427 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह उस साल राजनीतिक दलों को मिले कुल चंदे का करीब 74 फीसदी था।

🔹2020-21: कोरोना साल में भारी गिरावट: कोरोना महामारी के असर वाले साल 2020-21 में BJP को मिलने वाला चंदा घटकर 578 करोड़ रुपये रह गया। कुल चंदे में पार्टी की हिस्सेदारी सिर्फ 4 फीसदी रही, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी कम थी।

🔹2021-22: फिर मजबूत वापसी: 2021-22 में हालात सामान्य होते ही BJP की फंडिंग में फिर उछाल आया। इस साल पार्टी को 1,775 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो कुल राजनीतिक चंदे का करीब 58 फीसदी था।

🔹2022-23: 2,120 करोड़ और बढ़ी हिस्सेदारी: वित्तीय वर्ष 2022-23 में BJP को 2,120 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इस दौरान पार्टी की हिस्सेदारी बढ़कर 61 फीसदी तक पहुंच गई, जिससे यह साफ हुआ कि कॉरपोरेट और अन्य दानदाताओं का भरोसा पार्टी पर बना हुआ है।

🔹2023-24: चुनावी माहौल में तेज उछाल: लोकसभा चुनाव से पहले 2023-24 में BJP को 3,967 करोड़ रुपये का चंदा मिला। हालांकि प्रतिशत के लिहाज से हिस्सेदारी 42 फीसदी रही, लेकिन रकम के हिसाब से यह अब तक के सबसे बड़े आंकड़ों में से एक था।

🔹2024-25: अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा - 6,088 करोड़: वित्तीय वर्ष 2024-25 में BJP के खाते में 6,088 करोड़ रुपये पहुंचे। यह पार्टी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा चंदा माना जा रहा है, जिसने राजनीतिक फंडिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

🟡 चुनावी बॉन्ड खत्म होने का असली मतलब क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित कर दिया था और SBI व चुनाव आयोग को दानदाताओं के नाम सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। इसके बाद कंपनियां और व्यक्ति चेक, डिमांड ड्राफ्ट, UPI और बैंक ट्रांसफर के जरिए चंदा दे रहे हैं। फर्क बस इतना है कि अब दान गुप्त नहीं रहा, लेकिन रकम पहले से कहीं ज्यादा हो गई है।

🟡 बड़ा सवाल अब भी कायम

चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद पारदर्शिता बढ़ी, लेकिन BJP की बढ़ती फंडिंग ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह जनता के भरोसे का नतीजा है या कॉरपोरेट सपोर्ट का असर। इतना तय है कि बॉन्ड हटने के बाद भी राजनीतिक फंडिंग का खेल थमा नहीं, बल्कि और तेज हो गया है। यही वजह है कि BJP के ₹6,088 करोड़ का आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की बदलती तस्वीर भी दिखाता है।

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