बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, इन 6 राज्यों की वोटर लिस्ट से आउट किए जाएंगे बांग्लादेशी
Election Commission: भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार की वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने का फैसला किया है। चुनाव आयोग के इस निर्णय का उद्देश्य वोटर लिस्ट से अयोग्य नामों को हटाना है और वोटर लिस्ट में दर्ज नामों का घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। इस प्रक्रिया के पीछे तीव्र शहरीकरण, लगातार हो रहे प्रवास और विदेशी अवैध प्रवासियों को कारण बताया गया है।
इसके साथ ही निर्वाचन आयोग (EC) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने छह राज्यों में मतदाता सूची की गहन समीक्षा करने और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को मतदाता सूची से हटाने की तैयारी कर ली है। इसकी शुरूआत बिहार से होगी, जहां इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं।

यह फैसला विभिन्न राज्यों में बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के मद्देनजर लिया गया है। निर्वाचन आयोग का लक्ष्य है कि मतदाता सूचियों में हर तरह की गड़बडियों को दूर करना है।
इन छह राज्यों में चुनाव आयोग चलाएगा अभियान
बता दें बिहार में 2025 में चुनाव होने वाले हैं और असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहां पर भी ये अभियान चलाया जाएगा। आयोग ने कहा है कि अंततः, वह पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू करेगा, ताकि "मतदाता सूचियों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन" किया जा सके।
देना होगा ये शपथ पत्र
इस बार चुनाव आयोग ने वोटर बनने या राज्य के बाहर से आने वाले आवेदकों के लिए एक अतिरिक्त 'घोषणा फॉर्म जारी किया है। मतदाता बनने वाले शख्स को शपथपत्र देना होगा कि जिसका जन्म 1 जुलाई, 1987 से पहले भारत में हुआ था। इसके साथ ही जन्म तिथि या जन्म स्थान को प्रमाणित करने वाला कोई भी दस्तावेज़ जमा करना होगा। घोषणापत्र में सूचीबद्ध विकल्पों में साबित करना होगा कि जन्म भारत में 1 जुलाई, 1987 और 2 दिसंबर, 2004 के बीच हुआ है। इसके अलावा आवेदकों को अपने माता-पिता की जन्मतिथि/स्थान के बारे में भी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे। बिहार के लिए अंतिम गहन पुनरीक्षण 2003 में किया गया था।
चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में हो सकता है बड़ा बदलाव
चुनाव आयोग के अनुसार, तेजी से हो रहे शहरीकरण, लगातार हो रहे पलायन, युवा नागरिकों के मतदान के लिए पात्र होने, मौतों की सूचना न देने और विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम सूची में शामिल होने जैसे कई कारणों से मतदाता सूचियों की शुचिता और त्रुटिरहित तैयारी सुनिश्चित करने के लिए पुनरीक्षण की आवश्यकता पड़ी है।












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