लोन मोरेटोरियम में ब्याज वसूली: सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, RBI के पीछे ना छिपें, खुद का स्टैंड लें

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के चलते केंद्र सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया था, जिसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने आज लोन मोरेटोरियम केस की सुनवाई के दौरान कहा देश की अर्थव्यवस्था में जो दिक्कत आई है वह केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए सख्त लॉकडाउन की वजह से है। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह कोयले की बकाया राशि और अफिडेविट दायर करने में देरी को लेकर अपना रुख साफ करे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि आप अपना रूख साफ करिए। आप कहते हैं कि आरबीआई ने फैसला लिया, हमने आरबीआई का जवाब देखा है, केंद्र आरबीआई के पीछे छिप रही है।

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      दरअसल लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार के द्वारा दिए गए लोन मोरेटोरियम पर बैंक ब्याज वसूल रहे हैं, इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने दो अलग-अलग किश्त में 6 महीने के लोन मोरेटोरियम का ऐलान किया था और लोगों को ईएमआई नहीं देने की छूट दी थी। लोन पर दी गई मोरेटोरियम की मियाद 31 अगस्त को खत्म हो रही है।

      केद्र सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कोर्ट ने कहा कि आप एक समय सीमा बताइए किकबतक लोन मोरेटोरियम को लेकर एफिडेविट फाइल करेंगे। जिसके बाद तुषार मेहता ने एफिडेविट फाइल करने के लिए समय मांगा है। मौजूदा अर्थव्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि यह समय बिजनेस के बारे में सोचने का नहीं है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए। सिब्बल ने कहा कि मोरेटोरियम की अवधि 31 अगस्त को खत्म हो रही है। 1 सितंबर के बाद से हम सभी डिफॉल्ट लिस्ट में होंगे। इसके बाद ये लोन एनपीए बन जाएंगे, जोकि बड़ी समस्या बनेगा।

      सिब्बल ने कोर्ट में मोरेटोरियम की अवधि को आगे बढ़ाने की भी मांग की, उन्होंने कहा कि जबतक कि यह मसला सुलझ नहीं जाता तबतक मोरेटोरियम की अवधि को बढ़ाया जाए। आरबीाई ने कहा है कि अगली तिमाही में हालात और भी खराब होगी क्योंकि हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। जिसका तुषार मेहता ने विरोध किया।

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