तेलंगाना विधासभा चुनाव से पहले ECI ने 13 पुलिस अधिकारियों और चार कलेक्टरों कर चुकी है ट्रांसफर, जानें वजह
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। चुनाव के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी ना हो इस पर भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की पैनी नजर है। वहीं अब चुनाव आयोग ने राज्य के चुनाव से पहले प्रदेश के 13 पुलिस अधिकारियों और चार कलेक्टरों का तबादला कर दिया। ईसीसी ने इन अकिधकारियों को ट्रांसफर असंतोषजनक प्रदर्शन बताते हुए किया है।

हालांकि चुनाव आयोग को कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तेलंगाना की सत्तारुढ़ बीआरएस के नेताओं के करीबी अधिकारियों की शिकायत की थी। बीआरएस के नेताओं के करीबी अधिकारियों के कारण तेलंगाना में पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल पर उठ रहा था कि क्या ये अधिकारी उन नेताओं का समर्थन करेंगे जिन नेताओं के वो करीबी हैं। जिसके बाद चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों को स्थानान्तिरित किया था। तेलंगाना पुलिस पर विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए निवारक निरोध अधिनियम का दुरुपयोग भी किया गया है।
गौरतलब है कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव की तरीखों की घोषणा से पहले तक राज्य की पुलिस किसी भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम से पहले विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने में व्यस्त रही है।
बता दें तेलंगाना राज्य के गठन के बाद से ही राज्य में पुलिस व्यवस्था का आधुनिकरण हुआ इसके साथ ही राज्य की पुलिस राजनीतिक ताकत बन गई है। राज्य और विपक्षी दलों पर नियंत्रण हासिल करने में पुलिस बल ने सक्रिय रूप से सत्तारूढ़ बीआरएस की मदद की है।
पुलिस विपक्षी पार्टियों के नेताओं पर निवारक गिरुफ्तारियां करने के लिए फेमस हैं।जैसे इसी साल 24 मार्च को कांग्रेस के रेवंत रेड्डी को तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) परीक्षा प्रश्न पत्र लीक को लेकर उस्मानिया विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए तेलंगाना पुलिस ने उन्हें नजरबंद किया था
इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के प्रवीण कुमार को 12 अगस्त को टीएसपीएसपी ग्रुप 2 परीक्षा मुद्दें पर सत्याग्रह दीक्षा के समय पकड़ा था।
इतना ही नहीं सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्टूबर की शुरुआत में, आईटी मंत्री केटी रामा राव की राज्य भर में यात्राओं के कारण विपक्षी नेताओं की कई निवारक हिरासत ओर घर में नजरबंद किया गया था।
सच पूछे तो तेलंगाना पुलिस ने पिछले एक दशक में यानी राज्य के गठन के बाद से राज्य में किसी भी विपक्षी राजनीतिक दल को या गुट को विरोध-प्रदर्शन करने के लिए जुटने की परमीशन नहीं दी है।












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