MNREGA मजदूरों के लिए सरकार की नई शर्त, नहीं पूरा किया ये प्रोसेस तो रुक सकता है काम
MNREGA e-KYC: देश के लाखों ग्रामीण मजदूरों के लिए लागू मनरेगा योजना में अब एक बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत काम करने वाले सभी सक्रिय जॉब कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी (Electronic Know Your Customer) को अनिवार्य कर दिया है।
यह फैसला ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पारदर्शिता और गड़बड़ी रोकने के उद्देश्य से लिया है। कई राज्यों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जबकि कुछ जिलों में 31 अक्टूबर तक की समय सीमा तय की गई है।

सरकार का मानना है कि ई-केवाईसी से अब हर असली मजदूर की पहचान सुनिश्चित होगी और किसी भी "फर्जी लाभार्थी" को मनरेगा का पैसा नहीं मिल सकेगा।
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ई-केवाईसी क्यों जरूरी है?
मनरेगा के तहत हर साल करोड़ों रुपये की मजदूरी सीधे मजदूरों के खाते में दी जाती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि इस योजना में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
1. फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी
ई-केवाईसी की मदद से हर मजदूर की पहचान आधार कार्ड के जरिए तय होती है। इससे "भूतिया जॉब कार्ड" या फर्जी नामों पर भुगतान रोकने में मदद मिलेगी।
2. डिजिटल उपस्थिति की सटीकता
अब मनरेगा मजदूरों की हाजिरी NMMS ऐप (National Mobile Monitoring System) से ली जा रही है। यह ऐप Face RD App के जरिए मजदूर की चेहरे की पहचान करता है। ई-केवाईसी पूरी होने पर ही मजदूर की उपस्थिति दर्ज की जा सकती है।
3. सीधे खाते में मजदूरी (DBT सिस्टम)
ई-केवाईसी के जरिए मजदूर का बैंक खाता आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (ABPS) से जुड़ता है, जिससे मजदूरी सीधे और समय पर खाते में पहुंचती है।
अगर ई-केवाईसी नहीं कराई तो क्या होगा?
जो मजदूर तय तारीख तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराएंगे, उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
- हाजिरी नहीं लगेगी: बिना ई-केवाईसी मजदूर NMMS ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाएंगे।
- काम और मजदूरी रुक सकती है: बिना उपस्थिति के सिस्टम उन्हें "निष्क्रिय" दिखाएगा, जिससे काम या मजदूरी नहीं मिल पाएगी।
ई-केवाईसी पूरी करने की प्रक्रिया
मनरेगा के सक्रिय जॉब कार्ड धारक नीचे दिए गए आसान चरणों में ई-केवाईसी कर सकते हैं -
- ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय जाएं
- संबंधित पंचायत कार्यालय या प्रखंड विकास कार्यालय में जाएं।
- आवश्यक दस्तावेज साथ रखें
- मजदूर को अपना आधार कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड लेकर जाना होगा।
- सत्यापन प्रक्रिया पूरी करें
- ग्राम रोजगार सहायक या पंचायत सचिव आधार नंबर की बायोमेट्रिक या चेहरे की पहचान के माध्यम से सत्यापन करेंगे।
- सफल सत्यापन के बाद पुष्टि मिलेगी
- जब आधार और चेहरे का मिलान NMMS ऐप में सफल होता है, तो ई-केवाईसी पूरी मानी जाती है।
सरकार का उद्देश्य - पारदर्शी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था
केंद्र सरकार का लक्ष्य मनरेगा को भ्रष्टाचार मुक्त और डिजिटल रूप से पारदर्शी बनाना है। ई-केवाईसी के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर वास्तविक मजदूर को उसकी मेहनत की कमाई सीधे, सुरक्षित और समय पर मिले।
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