कोरोना वैक्सीन को लेकर DCGI की गाइडलाइन, 50 प्रतिशत कारगर होना जरूरी
नई दिल्ली: देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 56 लाख के पार पहु्ंच गई है। इसके साथ ही अब रोजाना 95 हजार के करीब मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना के कहर को रोकने के लिए भारत में भी तीन वैक्सीन का ट्रायल अलग-अलग स्टेज पर है। वैक्सीन को लेकर सरकार भी गंभीर है, जिस वजह से अभी से ही ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इसको लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है। उन्होंने वैक्सीन बना रही कंपनियों से साफ कर दिया है कि बाजार में आने से पहले तीसरे चरण के ट्रायल में उसका 50 प्रतिशत कारगर होना जरूरी है।
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गाइडलाइन में कहा गया कि जो कंपनियां भारत में वैक्सीन बना रही उन्हें संवर्धित श्वसन रोग (ईआरडी) के संभावित जोखिम से संबंधित सारा डेटा DCGI को देना होगा। इसके अलावा वैक्सीन बनाते वक्त गर्भवती महिलाओं के भी बारे में ध्यान रखा जाए। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में वैसे तो 30 वैक्सीन पर काम चल रहा है, लेकिन अभी उसमें से तीन ही क्लीनिकल ट्रायल के स्टेज में पहुंच पाई हैं।
DCGI ने फॉर्मा कंपनियों को ट्रायल डेटाबेस बंद करने से पहले एक फाइनल एनालिसिस प्लान देने को कहा है। उनके मुताबिक अगर किसी भी कंपनी का ट्रायल मापदंडों को पूरा करने में विफल रहता है, तो लाइसेंस के साथ आगे बढ़ने से पहले इसके नैदानिक प्रभावों पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर WHO भी ये मान चुका है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रभावकारी वैक्सीन को स्वीकार किया जा सकता है, क्योंकि एस्ट्राजेनेका जैसी कंपनियां भी इसी आधार पर काम कर रही हैं।
क्या कह रहा ICMR?
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव के मुताबिक किसी भी वैक्सीन में तीन चीजें सुरक्षा, इम्युनोजेनेसिटी, और प्रभावकारिता अहम है। किसी भी वायरस के लिए वैज्ञानिक 100 प्रतिशत कारगर वैक्सीन नहीं बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम 100 फीसदी एफिसिएंसी (कारगरता) के लिए लक्ष्य बना रहे हैं, लेकिन 50-100 फीसदी के बीच की प्राप्त कर सकते हैं।












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