Droupadi Murmu Unknown Facts: शाकाहारी हैं द्रौपदी मुर्मू ,करती हैं शिव की पूजा, रोज पीती हैं हल्दी वाला दूध
नई दिल्ली , 25 जुलाई। आज पूरे भारत के लिए गौरव का दिन है, आज देश के सर्वोच्च पद एक आदिवासी महिला विराजमान हो गई हैं और वो महिला हैं द्रौपदी मुर्मू, जिनके संघर्ष की कहानी सुनकर हर किसी के रोंगटें खड़े हो जाएंगे। अपने दो जवान बेटों और पति को खोने के बाद अगर उनकी जगह कोई दूसरी महिला होती तो वो या तो टूट जाती, या बिखर जाती लेकिन द्रौपदी मुर्मू ने ना केवल खुद को संभाला बल्कि उन्होंने तो समाज और देश को संभालने, सुधारने और संवारने की जिम्मेदारी ले ली।
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'छात्रों की फेवरेट टीचर रही हैं द्रौपदी मुर्मू'
आपको बता दें कि उनके घरवालों ने उनके संघर्ष और दर्द की बातें मीडिया से शेयर की है। ओडिशा के एक स्थानीय चैनल से बात करते हुए उनकी पोती सुनीता मांझी ने कहा कि 'उन्हें अपनी दादी पर गर्व है, वो लोगों के लिए मिसाल हैं, तमाम परेशानियां झेलकर भी वो हमेशा शांत रहती हैं और कभी भी क्रोधित या विचलित नहीं होती हैं। उन्होंने ये भी बोला की अपने मिलनसार व्यवहार की ही वजह से ही वो अपने छात्रों की फेवरेट टीचर रही हैं।'

निरंकारी शिव की पुजारन हैं द्रौपदी मुर्मू
एक वक्त था, जब द्रौपदी अपने पति और बेटों को खोने के बाद काफी मानसिक रूप से दुखी हो गई थीं लेकिन तब भी उन्होंने खुद को बिखरने से बचाने के लिए ओडिशा के रायरंगपुर स्थित ब्रह्माकुमारी योग संस्थान में जाकर साधना शुरू की, वो आज भी इस संस्थान से जुड़ी हुई हैं। वैसे वो शिवभक्त हैं और अपने भोले-भंडारी की पूजा वो पूरी आस्था और विश्वास के साथ करती हैं और संयोग देखिए कि सावन के महीने में ही वो राष्ट्रपति बनी हैं। खास बात ये है कि द्रौपदी मुर्मू निरंकारी शिव की पुजारन हैं।

'नहीं खाती हैं लहसुन-प्याज'
ब्रह्माकुमारी योग संस्थान से जुड़ने के बाद द्रौपदी मुर्मू के जीवन में काफी बदलाव आया, उन्होंने मांसाहारी भोजन त्याग दिया यहां तक कि वो अब लहसुन-प्याज भी छोड़ चुकी हैं। उनकी एक सधी हुई दिनचर्या है, वो रोज सुबह जल्दी उठती हैं, वॉक करती हैं और नहा-धोकर अपने निरंकारी शिव को याद करते हुए योग करती हैं।

'पखाल और सजना का साग'
उनके नाश्ते में दलिया और दिन के भोजन में पखाल और सजना का साग शामिल होता है तो वहीं रात में वो नियमित रूप से हल्दी के दूध का सेवन करती हैं। उनके घरवालों ने ये भी बताया कि द्रौपदी मुर्मू खुद भी बहुत अच्छी कुक हैं और काफी स्वादिष्ट भोजन बनाती हैं।

राजनीतिक जीवन
पेशे से टीचर मुर्मू ने साल 1997 में राजनीति में कदम रखा था और उन्होंने राइरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव जीता था। इसके बाद वो भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष बनीं तो वहीं 2000 और 2009 में भाजपा के टिकट पर मयूरभंज जिले की रायरंगपुर सीट से एमएलए चुनी गई तो वहीं वो साल 2000 और 2004 के बीच में ओडिशा केबिनेट में मंत्री भी रहीं, वो साल 2015 में झारखंड की राज्पाल बनीं तो वहीं साल 2022 में देश की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गई हैं।












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