नीति आयोग के सदस्य ने दी कोरोना में आयुर्वेद का सहारा लेने की सलाह, मेडिकल एक्सपर्ट ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, 14 अप्रैल: देश में कोरोना मरीजों की संख्या तेज रफ्तार से बढ़ रही है, जहां अब रोजाना 1.80 लाख के करीब मामले सामने आने लगे हैं। इतने ज्यादा मामलों की वजह से अस्पतालों में बेड और दवाइयां कम पड़ रही हैं। इस बीच मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग की और देश में कोरोना के हालात को बताया। जिसमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने लोगों को आयुर्वेद से जुड़ी एक सलाह दी थी, इस पर अब एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए हैं।
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डॉ. पॉल ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना होता है, तो वो आयुर्वेद एक्सपर्ट से भी सलाह ले। साथ ही उनकी ओर से बताए गए इम्युनिटी बूस्ट की सलाह का पालन करे। इसके अलावा सरकार ने भी अपनी गाइडलाइन में एक दिन में दो बार च्यवनप्राश, हल्दी वाला दूध, काढ़ा जैसी चीजों का प्रयोग करने की सलाह दी है। उन्होंने होम्योपैथी डॉक्टरों से भी सलाह लेने की नसीहत दी। डॉ. पॉल के मुताबिक इन सब चीजों से मदद मिलती है, जिस वजह से स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे संबंधित एडवाइजरी दी है।
वहीं इस सलाह पर मेडिकल एक्सपर्ट्स ने नाराजगी जाहिर की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रमुख डॉ. रजन शर्मा ने कहा कि डॉ. पॉल की बातें लोगों को गुमराह करने जैसी हैं। अगर किसी शख्स को कोरोना होता है, तो वो काढ़ा पीए अस्पताल ना जाए? काढ़े से वैक्सीन की जरूरत खत्म हो जाएगी। आप कहां पर उतरेंगे? अगर ये सब चीजें इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती हैं, तो वैक्सीन की क्या जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ये सब सुनने के बाद बहुत से लोग कोरोना होने के बाद घर पर बैठे रहते हैं और काढ़ा-हल्दी वाला दूध जैसी चीजें पीते हैं। बाद में जब उनकी हालत बिगड़ती है, तो वो अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक बहुत देर हो जाती है। इस पर डॉक्टरों पर इलाज ना करने का आरोप भी लगता है।












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