इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताए कैसे थे लता मंगेशकर के अंतिम पल? जानकर आप हो जाएंगे भावुक
मुंबई, 07 जनवरी: 'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर का कल 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। पिछले महीने 8 जनवरी को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद लता मंगेशकर को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। इस दौरान वे निमोनिया से भी ग्रस्त हो गई थीं और लंबे समय तक आईसीयू में रहने के बाद आखिरकार जिंदगी से जंग हार गईं। लता मंगेशकर के निधन के बाद ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने दिवंगत महान गायिका के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि, कैसे अपने अंतिम क्षणों में भी उनके चेहरे पर मुस्कान थी।

'लता जी की तबियत हर दिन बिगड़ती गई'
पिछले तीन साल से लता मंगेशकर का इलाज कर रहे डॉक्टर समदानी ने कहा, जब भी लता जी की तबीयत खराब होती तो मैं उनका इलाज करता, लेकिन इस बार उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। हालांकि हमने अपनी कोशिशें जारी रखीं लेकिन आखिरकार हम उन्हें बचा नहीं पाए। डॉ समदानी ने यह भी खुलासा किया कि जब भी उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता था तो वह कहा करती थीं कि सभी की देखभाल समान रूप से होनी चाहिए।

'अंतिम समय में उनके चेहरे पर मुस्कान औऱ संतोष का भाव था'
उन्होंने आगे बताया कि, इसके साथ ही वह जो भी इलाज जरूरी होता था, उसके लिए हमेशा तैयार रहती थीं। इलाज से बचने का उन्होंने कभी कोई प्रयास नहीं किया। लता जी के सरल स्वभाव के बारे में बात करते हुए डॉ समदानी ने आगे कहा, मैं उनकी मुस्कान को जीवन भर याद रखूंगी। अपने अंतिम क्षणों में भी उनके चेहरे पर मुस्कान थी। पिछले कुछ वर्षों से उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था और इसलिए वह किसी से ज्यादा नहीं मिल पाती थी।

'बहुत कम बात करती थी लता जी'
उन्होंने कहा, जब से मैं उनका इलाज कर रहा हूं, लता दीदी बहुत कम बोलती थीं और ज्यादा नहीं बोलती थीं। हालांकि, भगवान की उनके लिए अलग योजना थी और वह हम सभी को हमेशा के लिए छोड़ गईं। हमने उनके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन ईश्वर के आगे किसी की नहीं चलती है। डॉक्टर के मुताबिक, सेप्टिक शॉक के कारण रविवार को उनकी मृत्यु हो गई। बता दें कि सेप्टिक शॉक एक खतरनाक स्थिति है, जब मरीज के कई अंग एक साथ क्षतिग्रस्त हो निष्क्रिय (मल्टी ऑर्गन फेल्योर) हो जाते हैं।












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