डोकलाम: चीन पर मोदी की बड़ी कूटनीतिक जीत, बनाई थीं ये 5 रणनीति

नई दिल्ली। चीन भले ही आए जिन भारत को युद्ध की धमकी देता रहा, लेकिन मोदी सरकार चीन की इस गीदड़ भभकी से बिल्कुल नहीं डरी। चीन के आक्रामक रवैये के बावजूद भारत ने संयम बरता और अपनी रणनीति बनाता रहा। अब डोकलाम विवाद में दोनों देशों की सीमा पीछे हटने का फैसला पीएम मोदी की एक कूटनीतिक जीत है। आइए जानते हैं वो 5 रणनीतिक कदम, जिनसे मोदी सरकार को मिली ये कूटनीतिक जीत।

1- धमकियों से डरे नहीं

1- धमकियों से डरे नहीं

चीन की तरफ से लगातार भारत को युद्ध की धमकी दी जाती रही, लेकिन भारत किसी धमकी से नहीं डरा। इतना ही नहीं, चीन को यह भी कहा गया कि अब भारत सन 1962 जैसा नहीं है। इस संदेश का सीधा मतलब था कि अगर अब युद्ध होता है तो भारत मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। पीएलए की वर्षगांठ पर चीन ने अपने हथियारों और मिसाइलों का भी पहली बार प्रदर्शन किया, जिससे वह भारत को डराना चाहता था, लेकिन उसकी यह चाल भी नाकामयाब रही और भारत उससे कतई नहीं डरा।

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    2- सेना पीछे नहीं हटाई

    2- सेना पीछे नहीं हटाई

    बार-बार धमकियां मिलने के बावजूद मोदी सरकार ने डोकलाम से अपनी सेना पीछे नहीं हटाई। उल्टा जरूरत पड़ने पर और अधिक सेना डोकलाम में तैनात कर दी गई। चीन बार-बार यह कहता रहा कि जब तक भारत अपनी सेना डोकलाम से नहीं हटाएगा, तब तक बातचीत नहीं होगी, लेकिन वह खुद भी अपनी सेना पीछे नहीं हटा रहा था। इसी के चलते मोदी सरकार ने भी सेमा को डोकलाम में डटे रहने को कहा और अब फैसला यह हुआ है कि दोनों देशों की सेनाएं डोकलाम से पीछे हटेंगी।

    3- अजीत डोवाल को बातचीत के लिए भेजा

    3- अजीत डोवाल को बातचीत के लिए भेजा

    चीन से बातचीत करने के लिए मोदी सरकार ने काफी अहम कदम उठाते हुए अजीत डोवाल को भेजा। पीएम मोदी चाहते तो चीन से बात करने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज या फिर सरकार के किसी अन्य व्यक्ति को भी भेज सकते थे, लेकिन वह भी यह समझते हैं कि देश की सुरक्षा और सेना के मामले को अजीत डोवाल से अच्छा कौन समझेगा। आखिरकार अजीत डोवाल को चीन भेजना रंग लाया है।

    4- अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया

    4- अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया

    जहां एक ओर चीन की तरफ से बार-बार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगे हुए थे। डोकलाम विवाद के मुद्दे पर अमेरिका और जापान भारत के पक्ष में बोले, जिससे चीन पर एक तगड़ा दबाव बना। पीएम मोदी का अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना आखिरकार रंग लाया और डोकलाम विवाद आगे बढ़ने से पहले ही दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट रही हैं और अब इस मुद्दे पर बातचीत होगी।

    5- चीन पर वाणिज्यिक दबाव बनाया

    5- चीन पर वाणिज्यिक दबाव बनाया

    भारत ने चीन के 93 प्रोडक्ट पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई, चीन समेत कई देशों की मोबाइल निर्माता कंपनियों को नोटिस जारी करके पूछा कि उनके मोबाइल से लोगों की निजी जानकारी तो चोरी नहीं हो रही है। वहीं दूसरी ओर देश भर में लोग डोकलाम विवाद से गुस्सा होकर चीनी सामान का बहिष्कार करने की बातें कर रहे थे। जगह-जगह चीनी सामान का बहिष्कार शुरू हो गया था, जिससे चीन पर एक वाणिज्यिक दबाव भी बनने लगा।

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