'असम में फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई गई', अल्पसंख्यक सर्टिफिकेट पर बोले AIDUF नेता
नई दिल्ली, 31मई। एआईयूडीएफ (AEDUF) ने अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्रदान करने के असम कैबिनेट के फैसले की निंदा की है। एआईयूडीएफ विधायक और पार्टी महासचिव अमीनुल इस्लाम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अलग पहचान देने की आवश्यकता नहीं है। संविधान पहले ही समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा दे चुका है।

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असम के मंत्री केशब महंत ने रविवार को छह धार्मिक समुदायों- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी के लोगों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्रदान करने के फैसले की घोषणा की। असम सरकार के फैसले की घोषणा के एक दिन बाद ही विरोध शुरू हो गया।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIDUF ) और कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की। एआईयूडीएफ विधायक और पार्टी महासचिव अमीनुल इस्लाम ने इसे 'फूट डालो और राज करो की नीति' कहा है। उन्होंने कहा कि संविधान ने समुदायों को पहले ही अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है। अलग से इन्हें तो लाभान्वित किया जा सकता है लेकिन इस तरह अलग पहचान देना सही नहीं।
AIUDF विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि 'सरकार का यह कदम मुस्लिम समुदाय को अलग-अलग विभाजित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सरकार मुस्लिम समुदाय को अलग-अलग बांटने की कोशिश कर रही है, जो अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति का तरीका है और वह नीति भाजपा ने अपनाई है।












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