एर्नाकुलम कोर्ट ने दिलीप को दी क्लीन चिट, 2017 मामले में सभी आरोपों से बरी, आया पहला रिएक्शन
एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने सोमवार को अभिनेता दिलीप को 2017 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि दिलीप के खिलाफ साजिश के आरोप को साबित करने में प्रॉसिक्यूशन नाकाम रहा। वहीं, सुनील एनएस उर्फ 'पल्सर सुनी' की अगुवाई वाला गैंग दोषी पाया गया। फैसले के बाद दिलीप ने कहा कि मैं भगवान का धन्यवाद करता हूं। सच की जीत हुई है।
12 दिसंबर को सजा पर सुनवाई
उन्होंने आगे कहा कि मेरे खिलाफ पुलिस टीम ने एक झूठी कहानी बनाई और कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे फैलाया। आज अदालत में वह कहानी गिर गई। मेरे करियर और छवि को खराब करने की कोशिश की गई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश हनी एम. वर्गीज ने सुबह 11 बजे फैसला सुनाया। दोषियों की सजा पर सुनवाई 12 दिसंबर को होगी।

क्या हुआ था 17 फरवरी 2017 को
पीड़िता त्रिशूर से कोच्चि जा रही थी और इसी दौरान आरोपी मार्टिन एंटनी उसकी लोकेशन लगातार सुनी को देता रहा। रास्ते में गैंग ने एथानी के पास रात 9.15 बजे एक नकली हादसा दिखाकर गाड़ी रुकवाई। इसके बाद आरोपी कार में घुस गए, पीड़िता को बंधक बनाया और सुनी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पूरे घटना क्रम के दौरान सुनी ने मोबाइल से वीडियो भी रिकॉर्ड किए।
दूसरा चार्जशीट और दिलीप पर आरोप
नवंबर 2017 में पुलिस ने दूसरा चार्जशीट दाखिल कर दावा किया कि दिलीप ने सुनी के साथ मिलकर साजिश की थी। लेकिन अदालत ने पाया कि इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।
लंबा और जटिल ट्रायल
- ट्रायल 8 मार्च 2018 को शुरू हुआ।
- 261 गवाहों से बंद कमरे में बयान लिए गए।
- इनमें कई फिल्म कलाकार भी शामिल थे।
- 28 गवाह अदालत में मुकर गए।
- दो सरकारी वकील बीच में हटे।
- prosecution ने 833 दस्तावेज और 142 सबूत पेश किए।
- defence ने 221 दस्तावेज दिए।
- गवाहों की पूछताछ में 438 दिन लगे।












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