दिल्ली हाईकोर्ट ने माना, शारीरिक संबंध बनाने से पत्नी का मना करना हो सकता है तलाक का आधार
कोर्ट ने कहा है कि महिला का पति अदालत में तलाक के लिए ठोस आधार पेश करने में सफल रहा है, लेकिन महिला तलाक न देने का कोई भी ठोस आधार पेश नहीं कर सकी है।
नई दिल्ली। अगर कोई महिला अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से मना करती है और उस पर किसी अन्य महिला के साथ संबंध होने के झूठे आरोप लगाती है तो ऐसी स्थिति में इस बात के आधार पर पति अपनी पत्नी से तलाक ले सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई करते समय उसका निपटारा करते हुए दी है। कोर्ट ने यह बाद एक महिला की याचिका को रद्द करते हुए कही। दरअसल, फरवरी 2002 में उस शख्स की शादी हुई थी और तभी से महिला उसससे अलग रह रही थी, जिस पति ने तर्क दिया था कि यह उसके साथ क्रूरता है।

इसके बाद व्यक्ति ने एक निचली अदालत में इन्हीं बातों के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, जिस पर निचली अदालत ने तलाक की मांग को जून 2016 में स्वीकार कर लिया था, लेकिन महिला ने इसके बाद निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के सभी तथ्यों को स्वीकार कर लिया है।












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