विमुद्रीकरण पर टाटा ने कहा- तीन बड़े सुधारों में से एक, फैसले को देश के समर्थन की जरूरत
रतन टाटा ने पीएम मोदी के इस फैसले को साहसिक बताया है।
नई दिल्ली। इसी माह 8 की तारीख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश के दौरान यह घोषणा की थी कि 500 और 1,000 रुपए की करेंसी विमुद्रीकृत उसी दिन आधी रात के बाद से विमुद्रीकृत कर दी गई है।
इस घोषणा के बाद पूरा देश परेशान हो उठा। उन्होंने कहा था कि यह कदम आतंकवाद और कालेधन के नासूर को खत्म करने के लिए उठाया जा रहा है।
हालांकि इस घोषणा के बाद से विपक्ष सरकार का विरोध कर रहा है। कांग्रेस, जदयू, टीएमसी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस फैसले के विरोध में कड़ा विरोध दर्ज कराया।
लोग कर रहे हैं समर्थन
वहीं बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसे यह फैसला अच्छा लग रहा है साथ ही उसका कहना है कि इससे देश की आर्थिक हालात अच्छी हो जाएगी।
इसी कड़ी में उद्योगपति और टाटा समूह के अंतरिम अध्यक्ष रतन टाटा ने शनिवार को कहा कि नोटबंदी भारतीय इतिहास के तीन महत्वपूर्ण सुधारों में से एक है।

साथ ही उन्होंने कहा कि इसकी सफलता के लिए देश के समर्थन की जरूरत है। अपने ट्विटर एकाउंट पर टाटा ने लिखा है कि ' कालेधन से चल रही समानांतर अर्थव्यवस्था ने कर चोरी को बढ़ावा दिया है। इसकी वजह से ही मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा है।'
टाटा ने लिखा है...
लिखा है कि देश में चल रही काले बाजार की अर्थव्यवस्था के खिलाफ विमुद्रीकरण की योजना लागू कर प्रधानमंत्री ने जबरदस्त साहस दिखाया है।
बकौल टाटा लाइसेंस राज की समाप्ति और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को लागू करने के साथ ही भारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में विमुद्रीकरण एक बड़ा कदम है।
लिखा गया है कि फिलहाल प्रधानमंत्री का ध्यान मोबाइल और डिजिटल पेमेंट की ओर है जो देश को कैश लेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगा जो आर्थिक रूप से गरीबों और वंचितों के लिए फायदेमंद होगा।
22 नवंबर को टाटा ने लिखा था...
इससे पहले भी टाटा ने सरकार की ओर विमुद्रीकरण के कदम का समर्थन किया था।
22 नवंबर को किए गए एक ट्वीट में टाटा ने लिखा है 'पुरानी करेंसी को विमुद्रीकृत करना मोदी सरकार का बड़ा फैसला है। इसकी मदद से कालाधन और भ्रष्टाचार साफ हो जाएगा। इसे हमारे समर्थन की जरूरत है।'












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