ओडिशा: मशरूम उत्पादन को कृषि का दर्ज देने की मांग, OMGF ने उठाई मांग
ओडिशा में मशरूम उत्पादन को सराकारी प्रोत्साहन की मांग की जा रही है। इस बीच ओडिशा मशरूम उत्पादक संघ (OMGF) की बैठक में उत्पादकों ने बड़ा फैसला लिया। ओडिशा मशरूम उत्पादक संघ की यह 12वीं मीटिंग थी। जिसमें ओडिशा राज्य पोल्ट्री उत्पाद सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (OPOLFED) जैसे मशरूम पार्लर खोलने की मांग उठाई गई।
बैठक के बाद फेडरेशन के एक सदस्य ने कहा कि ओडिशा के मशरूम किसान राज्य में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दे रहे हैं। ऐसे में सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। सदस्य ने कहा, "हमारी मांग है कि मशरूम को फसल का दर्जा दिया जाए और कृषि नीति में शामिल किया जाए. यह टैग किसानों को अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाएगा।"

वहीं ओडिशा मशरूम उत्पादक संघ के अध्यक्ष अद्वैत पात्रा के मुताबिक फेडरेशन राज्य में अधिक गुणवत्तापूर्ण मशरूम उत्पादन चाहता। इसके लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में मशरूम पार्लर स्थापित करने की आवश्यकता है।
पात्रा ने मशरूम उत्पादन को कृषि का दर्ज देने की मांग करते हुए कहा, "हम तत्काल मशरूम पाउडर का उत्पादन चाहते हैं, जिसका हम देश भर में विभिन्न प्रकार के मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है।
ऐसे में इसे कृषि का दर्जा देने की आवश्यकता है।"
राज्य में मशरूम की बढ़ती कृषि को देखते हुए अब इसके उत्पादकों को बाजार उपलब्ध होने की समस्या का सामना कर पड़ रहा है। ऐसे में ओडिशा मशरूम उत्पादक महासंघ के सदस्यों ने मांग है कि ओडिशा सरकार को राज्य के विभिन्न शहरों में ओडिशा राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (OMFED) और ओडिशा राज्य पोल्ट्री उत्पाद सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (OPOLFED) की तर्ज पर राज्य में मशरूम पार्लर खोलने चाहिए। इससे मशरूम उत्पादकों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य मिल पाएगा।
बता दें कि बिहार के बाद ओडिशा तेजी से मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। ओडिशा में भवानीपटना जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर कुटेनपाडर गांव में करीब 55 घर हैं, जिनमें से 40 आदिवासी समुदाय के लोगों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नाबार्ड की ओर इस गांव को मशरूम गांव घोषित किया था।












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