Delhi Violence: हिंसा पीड़ित दिल्ली में अभी कैसे हैं हालात ?

नई दिल्ली- उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में हालात तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण बने हुए हैं। हालात को पूरी तरह सामान्य करने के लिए सुरक्षा बल लगातार गश्ती और फ्लैग मार्च कर रहे हैं, लेकिन लोगों में डर का माहौल खत्म नहीं हुआ है। लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए घरों से निकल जरूर रहे हैं, लेकिन अभी भी कई दुकानें बंद बताई जा रही हैं। वैसे जैसे-जैसे लोगों की आवाजाही बढ़ रही है, स्थिति पूरी तरह सामान्य हो रही है। लोगों में भरोसा का माहौल कायम करने के लिए पुलिस और अद्धसैनिक बल पूरी तरह से मुस्तैद हैं, लेकिन दंगा पीड़ितों में अभी भी दहशत का ये आलम है कि वह राहत कैंपों से निकलकर अपने घरों का जायजा लेने जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

विश्वास का माहौल कायम करने की कोशिशें जारी

विश्वास का माहौल कायम करने की कोशिशें जारी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगाग्रस्त इलाकों में मंगलवार को भी पैरामिलिट्री फोर्सेज ने फ्लैग मार्च किए हैं, क्योंकि कुछ जगहों पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बताई जा रही है, लेकिन राहत की बात ये है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में और शांतिपूर्ण बताई जा रही है। हिंसाग्रस्त इलाकों में संपत्ति के नुकसान का जायजा लेने वाली टीमें भी आंकलन का अपना काम शुरू कर दिया हैं। लेकिन, जो लोग अभी भी उन दिनों की दहशत से उबरे नहीं हैं और वे राशन और बाकी जरूरी सामानजमा कर रहे हैं। कुछ लोगों की शिकायत ये भी है कि उन्हें सरकार की ओर से अब तक कोई मेडिकल या कानूनी मदद नहीं मुहैया कराई गई है। पुलिस जिन इलाकों में लगातार फ्लैग मार्च कर रही है और स्थानीय लोगों के साथ बैठकें कर रही है, उसमें हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, चांद बाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार और मुस्तफाबाद के इलाके शामिल हैं।

कई दुकानें अभी भी बंद हैं

कई दुकानें अभी भी बंद हैं

दिल्ली हिंसा की सबसे चपेट में आने वाला एक इलाका शिव विहार भी है, जहां सैकड़ों लोगों को अपने घरों को छोड़ना पड़ा है। ऐसे लोग विस्थापित होकर चमन पार्क के राहत कैंपों में शरण लिए हुए हैं। यहां के कई लोगों का आरोप है कि उन्हें राज्य या केंद्र सरकार से किसी भी तरह की सहायता नहीं मिली है। इलाके में कुछ वकीलों ने हेल्पडेस्क बनाया है, जहां कई लोग आकर उनसे शिव विहार वाले उनके घरों तक जाने तक के लिए मदद मांग रहे हैं। इस हिंसा ने कारोबार को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई दुकानें अभी बंद हैं। एक दुकानदार के मुताबिक, "कुछ ही दुकानें खुली हुई हैं, सामान्य तौर पर किराना की दुकानें खुली हैं। बड़े शोरूम अभी भी बंद हैं, क्योंकि मालिक कोई भी जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं हैं।" जबकि, इलाके के स्कूल पहले से ही 7 मार्च तक बंद किए गए हैं। मंगलवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी शिव विहार इलाके के दंगाग्रस्त इलाके का जायजा लिया है।

दिल्ली हिंसा में हुई 47 की मौत

दिल्ली हिंसा में हुई 47 की मौत

इस बीच अधिकारियों की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि इलाके में शाति बनी हुई है और हिंसा का कोई भी ताजा मामला सामने नहीं आया है। बता दें कि रविवार शाम में हिंसा की अफवाह फैलाने के मामले में पुलिस पहले ही 40 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल समेत 47 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 के करीब लोग जख्मी हैं।

मोहम्मद शाहरुख बरेली से गिरफ्तार

मोहम्मद शाहरुख बरेली से गिरफ्तार

उधर 24 फरवरी को जाफराबाद-मौजपुर इलाके में एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तानने का आरोपी मोहम्मद शाहरुख को यूपी के बरेली से गिरफ्तार कर लिया गया है। बता दें कि उस दौरान शाहरुख दंगाइयों की भीड़ को लीड कर रहा था और 8 राउंड गोली भी फायर किए थे। उस वारदात के बाद से वह फरार था, लेकिन मंगलवार को वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

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