दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा ने अरविंद केजरीवाल को दिये 10 सुझाव
नई दिल्ली (अन्नू मिश्रा, डीयू)। आम आदमी के मूलमंत्र को जपने वाले अरविंद केजरीवाल आज बेल और जेल की राजनीति में इस कदर फंस गए हैं कि अब तो अपने भी उनसे कन्नी काटने लगे हैं। केजरीवाल अपने ही चक्रव्युह में फसते नज़र आ रहे हैं। बेल बॉन्ड न भरने की उनकी इस जिद ने उन्हें सुर्खियों में ला तो जरूर दिया पर जैसा वो चाहते थे उनका यह कदम जनता के बीच उन्हें एक क्रान्तिकारी के रूप में प्रदर्शित करेगा ऐसा हो नहीं पाया। उनकी ये चाल उन पर उल्टी ही पड़ी अब तो जनता भी पूछने लगी है कि केजरीवाल जी क्या आप आम आदमी हैं?
हैरत की बात तो यह है कि जिस पार्टी में इतने सिद्धहस्त वकील मौजूद हों उस पार्टी का लीडर कानूनी उलझनों में ऐसे कैसे फस सकता है। अगर केजरीवाल आम आदमी हैं तो वो क्यों सीधी राह नहीं चलते यह उनके समर्थकों को जरूर सोचना चाहिए। एक इंसान जो कानुन को समझता है। खुद को ईमानदार सिद्धांतवादी बताता है। जो अपने हर एक कदम पर कानून की लम्बी चौड़ी धाराओं की लिस्ट तक तैयार रखता है आज वो न्यायालय की आपराधिक अवमानना के ज़ुर्म में जेल में बंद है।
खुद को कानून से भी ऊपर स्थापित करने की ज़िद में एक साधारण सी कारवाही करने से इनकार कर रहा है। तो केजरीवाल जी आप साबित क्या करना चाहते हैं यह एक पहेली बन गई है। क्यों हर बार आपका हर कदम यह दर्शाता है कि सर आप आम नहीं खास हैं।
केजरीवाल अगर स्लाइडर में लिखीं 10 बातों पर ध्यान दें तो अब भी उनकी और उनकी पार्टी की स्थिति सुधर सकती है।

बिना प्रमाण चिल्लाना छोड़ दीजिये
बिना प्रमाण के अपने दुश्मन पर भी उंगली नहीं उठानी चाहिए। वैसे भी आम आदमी पार्टी ने अब तक जिस पर भी उंगली उठाई है उसे साबित करने में नाकाम ही रही है।

कानून से खेलना छोड़ देना चाहिए
आप ने चुनाव के दौरान भी ऑर उससे पहले भी कानून को हाथ में लिया है। सो डियर केजरीवाल जी अपनी यह होबी बदल दीजिए।

आपको अपने बर्ताव में बदलाव लाने की जरूरत है
जिस तरीके से आप खुद को न्यायालय में प्रदर्शित कर रहें है वो आपकी मुश्किलें ऑर बढ़ा सकती है। बेहतर होगा कि आप कोर्ट में खुद को क्रान्तिकारी सिद्ध करने की बजाय एक साधारण व्यक्ति के रूप में पेश करें।

आम बनिए खास नहीं
कुछ तो ऐसा कीजिए कि जनता को लगे की आप आम आदमी हैं। अगर आप आम आदमी है तो आप को एक साधारण आदमी की अपनी गलती मानते हुए बेल बोंड भर देना चाहिए।

न्यायालय को अंडरएस्टीमेट न करें
अरविंद जी आपके लिए भला यही होगा कि आप न्यायालय की शक्तियों को अंडरएस्टिमेट न करें। ऑर कम से कम ज़ज महोदया की बातों पर तो गौर फरमाइये. सुनने में आया है कि आपने तो उन्हें भी अपनी क्रान्तिवादिता का पाठ पढ़ाने में कोई हिचक नहीं की।

दोहरे व्यक्तित्व से बाहर आइये
खुद को एक स्पष्ट रुप में प्रदर्षित कीजिए। कहते कुछ हैं ऑर करते कुछ यह तो नाइंसाफी है सर।

पब्लिसिटी बहुत हुई अब वास्तविकता दिखाइये
आप जब से राजनीति में आए है कोई ऐसा दिन नहीं बीता जब आप पार्टी ने मीडिया को अपनी ओर आकर्षित करने के कारनामे न किये हों अब तो उनके यही पब्लिसिटी स्टंट उन पर ही हावि होने लगे हैं।

हर किसी के लिये निगेटिव धारणा मत बनाइये
यह आप और आपकी पार्टी के लिए नकारात्मकता ही पैदा कर सकता है। अति उत्तेजना भी कभी कभी ले डूबती है खासकर तब जब वो अतार्किक हो। वैसे भी आप जनता के लिए कुछ कर तो नहीं पाए पर अब कम से कम रोड जाम करके उनका टाइम बर्बाद मत कीजिए। कहीं ऐसा न हो कल से जनता ही आपके खिलाफ केस करने लगे।

देश बाद में पहले अपनी पार्टी बचाइये
आपको देश को बचाने से पहले अब अपनी पार्टी को बचाने पर ध्यान देना चाहिए। आपकी पार्टी बिखर रही है उसे बचाइये वरना आप पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

आप के हर सदस्य को दें वरीयता
केजरीवाल जी आपके लिये अंतिम सुझाव यह है कि आप अपने दल के हर सदस्य को बराबर से वरीयता दें। नहीं तो शाजिया इल्मी की तरह कई और भी आपका साथ छोड़ देंगे।












Click it and Unblock the Notifications