दिल्ली की हवा बेहद खराब, AQI पहुंचा 400 के पार, गंभीर' स्थिति में पहुंची वायु गुणवत्ता
नई दिल्ली। तमाम कोशिशों के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है, आज भी राजधानी की हवा बहुत ज्यादा खराब है, आज तो यहां AQI 400 पार कर गया है, गुरुवार सुबह आनंद विहार में हवा की क्वॉलिटी का सूचकांक (AQI) 401, अलीपुर में 405 AQI और वज़ीरपुर में 410 AQI दर्ज किया गया है, जबकि आरके पुरम में AQI 376, आईटीओ में AQI 384, लोधी रोड में AQI 311 और पंजाबी बाग में AQI 387 है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों के अनुसार सभी तीन 'गंभीर' श्रेणी में हैं।
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आज भी दिल्ली में सुबह धुंध की सफेद चादर छाई हुई है ,हालांकि दिल्ली सरकार लगातार प्रदूषण को नियंत्रण करने की कोशिश में लगी हुई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को लागू किया है, जिससे दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम किया जा सके तो वहीं दिल्लीवासी इस बार दिवाली पर केवल ग्रीन पटाखे ही चला सकेंगे। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
'ग्रीन' पटाखों की ही अनुमति
बुधवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि इस बार दिल्ली में केवल 'ग्रीन' पटाखों का उत्पादन, बिक्री और उपयोग करने की अनुमति रहेगी। उन्होंने कहा कि दीपावली पर जलाए जाने वाले पटाखों से दिल्ली की हवा प्रदूषित हो जाती है और उसका लोगों की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार तीन नवंबर से एंटी क्रेकर अभियान शुरू करेगी। गौरतलब है कि हर बार दिल्ली दिवाली के बाद और काफी प्रदूषित हो जाती है इसलिए इस बार सरकार ने सख्ती से ये कदम उठाया है।
सर्दी और प्रदूषण से कोरोना का खतरा
आपको बता दें कि राजधानी में सर्दी के मौसम ने दस्तक देनी शुरू कर दी है, पिछले तीन-चार दिनों से दिल्ली-NCR के तापमान में कमी आई है लेकिन पारा गिरने से वायु प्रदूषण भी बढ़ने लगा है और साथ ही धूल और पराली का धुआं भी हवा को प्रदूषित करने में पीछे नहीं है, ऐसे में मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई क्योंकि अगर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ा तो ये कोरोना वायरस से जंग लड़ रही राजधानी के अच्छी खबर नहीं होगी, इस मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कह चुके हैं कि त्योहारी मौसम में बढ़ता प्रदूषण, कम होता तापमान, बढ़ती भीड़ आदि से हर कोई जोखिम में है। वहीं जो लोग 'लॉन्ग कोविड' का सामना कर चुके हैं, उन्हें ऐसे में फ्लू की वैक्सीन ले लेनी चाहिए।
कोविड के कारण हो रही मौतों में प्रदूषण भी बड़ी भूमिका निभा रहा
तो वहीं एक स्टडी में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) की चपेट में आने वाले मरीजों के लिए वायु प्रदूषण जानलेवा साबित हो रहा है। वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस से हुई करीब 15 प्रतिशत मौतों का संबंध लंबे समय तक वायु प्रदूषण वाले माहौल में रहना बताया गया है। वहीं आईसीएमआर के प्रमुख बलराम भार्गव ने कहा कि, कोविड के कारण हो रही मौतों में प्रदूषण भी बड़ी भूमिका निभा रहा है इसलिए प्रदूषण पर लगाम बहुत जरूरी है।












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